पत्रकार बने पर्यावरण संरक्षण के पैरोकार – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

- हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पत्रकारों को कलम के कलाम बनने का दिया संदेश
- भारतीय संस्कृति छीनने में नहीं छोड़ने में विश्वास करती है
30 मई, ऋषिकेश।हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने देश के सभी पत्रकार बन्धुओं भगिनियों को शुभकामना देते हुये ’’कलम के कलाम’’ बनने का संदेश दिया। उन्होने कहा कि पत्रकार पर्यावरण संरक्षण के पैरोकार बने। उन्होने कहा, देश में निष्पक्ष एवं निर्भिक पत्रकारिता की शहनाई बजती रहेे। अब समय आ गया है कि पत्रकार सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ पर्यावरण, जल एवं स्वच्छता के विषय में भी अपनी कलम उठाये।
परमार्थ निकेतन के दिव्य गंगा तट पर आयोजित पर्यावरण एवं जल संरक्षण को समर्पित मानस कथा में आज श्रद्धालुओं को श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग श्री मुरलीधर जी महाराज ने सुनाया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, अयोध्या से पधारे रामानुजाचार्य स्वामी श्री विद्याभास्कर जी महाराज, अवध रत्न संत श्री देवेन्द्र दास जी महाराज, श्री राम निवास गोयल, अध्यक्ष दिल्ली विधानसभा, विधायक श्री रामचन्द्र यादव, विधायक श्री करण सिंह पटेल उ प्र, विधायक श्री आर के पटेल उ प्र, श्री हीरालाल यादव एम एल सी उप्र, श्री चेत नारायण सिंह एम एल सी उप्र व अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया। सभी विशिष्ट अतिथियों ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट की। स्वामी जी महाराज ने माननीय विधायकों से अयोध्या में सरयू नदी तथा लखनऊ में गोमती नदी साथ ही प्रयाग में गंगा एवं यमुना के दोनों ओर के तटों पर वृक्षारोपण कर सौन्दर्यीकरण के विषय में विचार विमर्श किया।


श्री राम कथा में आज भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह के प्रसंग पर बोलते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री राम और माता सीता जी ने जीवन का आदर्श प्रस्तुत कर पूरे विश्व को दिव्यता और पवित्रता का संदेश दिया। उन्होने कहा, जिस घर में पति-पत्नी मिलकर सामंजस्य के साथ रहते है वहीं प्रेम और खुशियों के झरने बहते है। उन्होने कहा विवाह का दूसरा नाम ही समर्पण, जहां समर्पण होगा वहां पर शान्ति होगी।

स्वामी जी ने कहा कि अपने यहां तो एक ही झगड़ा है ’’किस्सा कुर्सी का’’ परन्तु झगड़ा तो वहां भी हुआ ’’कुर्सी छीनने का नहीं बल्कि छोड़ने का’’ यहा है भारत का आदर्श; यह है भारतीय संस्कार। भगवान श्री रामजी के चरित्र का वर्णन करते हुये कहा कि युद्ध अगर हो भी तो ’’अयोध्या राज्य की गंेद बनाकर खेलने लगे खिलाड़ी, इधर राम और उधर भरत, दोनों ने ठोकर मारी। यहाँ फिर कुर्सी छीनने का नहीं बल्कि कुर्सी छोड़ने का युद्ध हुआ, भारतीय संस्कृति छीनने में नहीं छोड़ने में विश्वास करती है।’’

श्री मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री राम ने मर्यादा, कर्तव्यपरायणता और त्याग का संदेश दिया है। उन्होने दूसरों के सुख और वैभव के लिये अपना सर्वस्व त्याग किया। भगवान श्री राम ने न्याय, त्याग, समर्पण और मर्यादा का उत्कृष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया।
आज की मानस आरती के पश्चात स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी विशिष्ट अतिथियों को पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया तथा हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।
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