ग्रहण का प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव के ऊपर रहता है। मनुष्य की राशि के अनुसार शुभाशुभ फल, आर्थिक, शारीरिक व मानसिक प्रभाव देने वाला होता है। ग्रहण के दौरान भूमण्डल पर अनेक विषाणु, जीवाणु व कीटाणु उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण अनेक प्रकार के रोग भी होते हैं ।
इस विक्रम संवत 2077, वर्ष 2020 में, 5 ग्रहण लगेंगे । परन्तु; इनमें से सब ग्रहण का प्रभाव नहीं हमारे देश पर नहीं पड़ेगा। इस वर्ष के ग्रहण क्रमश: नीचे दिये हैं –
मान्द्य चन्द्रग्रहण: ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि, शुक्रवार, दिनाङ्क 05/06/2020 को है ।
कङ्कणाकृति सूर्यग्रहण: आषाढ़ कृष्ण, अमावस्या तिथि, रविवार, दिनाङ्क 21/06/2020 को है ।
मान्द्य चन्द्रग्रहण: आषाढ़ मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि, रविवार, दिनाङ्क 05/07/2020 को है ।
मान्द्य चन्द्रग्रहण: कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि, सोमवार, दिनाङ्क 30/11/2020 को है ।
खग्रास सूर्यग्रहण: मार्गशीर्ष मास, कृष्ण, अमावस्या तिथि, सोमवार, दिनाङ्क 14/12/2020 को है ।
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उपरोक्त दिये गये ग्रहणों में, तीन चन्द्रग्रहण और दो सूर्यग्रहण हैं। मान्द्य चन्द्रग्रहण अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी दृश्य रहेगा। परन्तु; यह उप-छाया के रूप में होगा अर्थात् धुँधला सा दृष्टिगोचर होगा। इसका धार्मिक मतानुसार शास्त्रों में कोई विशेष महत्त्व नहीं बताया गया है ।
कुछ तथाकथित ज्योतिषी इसे ग्रहण नहीं, अपितु; खगोलीय घटना मानते हैं । परन्तु; इस शब्दजाल में न उलझिएगा। क्योंकि वास्तविकता तो यह है कि इस प्रकार की खगोलीय घटना ही ग्रहण कहलाती है । तथापि; धर्मशास्त्र के द्वारा अनुप्राणित ( शास्त्रप्रमाण द्वारा प्रमाणित ) होने पर ही वह प्रभाव देने वाली कही जाती है और तब ही पूर्णतया सनातन धर्म के अनुसार उसमें सूतकादि नियमों का पालन किया जाता है ।
यही कारण है कि भारत वर्ष के अधिकांश पञ्चाङ्ग-कर्ताओं ने, इस ग्रहण का अपने पञ्चाङ्गों में उल्लेख ही नहीं किया है ।
फिर भी, हम यहाँ इसके स्पर्श आदि का विवरण दे रहें हैं –
दिनाङ्क 05/06/2020 वाला मान्द्य-चन्द्रग्रहण रात्रि11:16 से 2:34 तक रहेगा ।
स्पर्श – रात्रि 11:16
मध्य – रात्रि 12:55
मोक्ष – रात्रि 02:34
निष्कर्ष: वैदिक यात्रा शोधकेन्द्र के द्वारा प्रमाणित किया जाता है कि इस ग्रहण में सूतकादि नियमों का पालन अनिवार्य नहीं है ।
भागवत आचार्य अनुराग कृष्ण शास्त्री जी
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