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Chaitra Navratri 2025: शीला देवी मंदिर की चमत्कारी कहानी

Chaitra Navratri 2025: शीला देवी मंदिर की चमत्कारी कहानी

शीला देवी का मंदिर राजस्थान के आमेर किले (जयपुर) में स्थित है और इसकी कहानी आस्था, चमत्कार, और भक्ति से जुड़ी है। यह मंदिर मां दुर्गा के अवतार काली को समर्पित है। इस मंदिर का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसे आमेर के महाराजा मान सिंह प्रथम ने बनवाया था, और यहां प्रतिष्ठित शीला माता की मूर्ति की एक दिलचस्प और चमत्कारिक कहानी है।

शीला देवी मंदिर की कहानी

मंदिर की स्थापना की कहानी बंगाल से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि जब आमेर के राजा मान सिंह प्रथम मुगलों के साथ युद्ध में व्यस्त थे, तो उन्हें एक बार अपने राज्य में शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और राज्य में सुख-शांति के लिए दुर्गा माता की कृपा की आवश्यकता महसूस हुई।

राजा ने मां दुर्गा से प्रार्थना की और उन्हें एक सपना आया, जिसमें माता काली ने उन्हें कहा कि उनकी मूर्ति बंगाल के जेसोर (अब बांग्लादेश में) में एक जलाशय के पास दबी हुई है। माता ने राजा को निर्देश दिया कि वे वहां जाएं और मूर्ति को निकालकर अपने राज्य में स्थापित करें।

मूर्ति प्राप्ति और स्थापना

राजा मान सिंह ने माता के आदेश का पालन करते हुए जेसोर के जलाशय से उस मूर्ति को निकलवाया। हालांकि, जब मूर्ति को निकाला गया, तो वह खंडित अवस्था में थी। राजा इस बात से चिंतित हो गए, लेकिन माता ने उन्हें फिर स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि वे उसी मूर्ति को अपने किले में स्थापित करें। राजा ने उसी खंडित मूर्ति को जयपुर के आमेर किले में लाकर 1590 ईस्वी में इस मंदिर की स्थापना की।

मंदिर की विशेषता

  1. मूर्ति का स्वरूप: शीला देवी की मूर्ति काले पत्थर से बनी हुई है। मां का मुख तेजस्वी और विकराल है, जो उनके काली स्वरूप का प्रतीक है।

  2. नवरात्रि का विशेष महत्व: मंदिर में हर साल नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और बलि की परंपरा होती थी। पहले इस मंदिर में पशु बलि (बकरी की बलि) दी जाती थी, लेकिन अब यह प्रथा बंद हो चुकी है और प्रतीकात्मक पूजा की जाती है।

  3. भक्तों की आस्था: यह मंदिर न केवल राज परिवार के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी श्रद्धा का केंद्र रहा है। लोग यहां अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और शीला माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मंदिर और आमेर किले का संबंध

शीला देवी का मंदिर आमेर किले के प्रांगण में स्थित है। यह मंदिर किले के मुख्य द्वार के पास है, और यहां से किले का भव्य दृश्य दिखाई देता है। मंदिर का शिखर और स्थापत्य राजस्थानी वास्तुकला का शानदार उदाहरण है।

मंदिर से जुड़ी कुछ मान्यताएं और चमत्कार

  • मन्नतें पूरी करने वाली देवी: माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से शीला माता की आराधना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

  • सपनों में दर्शन: कई भक्तों ने यह भी बताया है कि मां शीला देवी उन्हें सपनों में दर्शन देकर मार्गदर्शन करती हैं।

नवरात्रि का त्योहार और विशेष पूजा

नवरात्रि के दौरान यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस दौरान विशेष पूजा-पाठ, हवन, और देवी जागरण का आयोजन होता है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Post By Religion World