माँ गंगा को हरित चुनरी अर्पित कर मनाया ’हरित चुनरी महोत्सव’
परमार्थ निकेतन के प्रांगण में भक्त लें रहे हैं सीताराम एवं राधेश्याम की दिव्य कथाओं का आनन्द
श्री राम कथा में ’सरयू’ एवं रस भागवत कथा में ’यमुना’ जी की महिमा सुन रहे हैं भक्तजन
आज के हरित चुनरी महोत्सव में पूज्यपाद स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं कथा व्यास पूज्यपाद स्वामी राधाकृष्ण जी महाराज ने पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण का दिया संदेश
विश्व बाजार नहीं परिवार है-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 16 मई। आज परमार्थ गंगा घाट पर पूज्य संतों ने पतित पावनी माँ गंगा को अविरल, निर्मल एवं प्रदूषण मुक्त रखने के लिये माँ गंगा को हरित चुनरी अर्पित कर ’हरित चुनरी महोत्सव’ मनाया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, गौ प्रेमी पूज्य स्वामी राधेश्याम जी महाराज, हरि मन्दिर, पटौदी हरियाणा से पधारे निष्ठावान, कवि हृदय मनीषी एवं अद्भुत संगठन क्षमता के धनी महमण्डलेश्वर पूज्य स्वामी धर्मदेव जी महाराज, पूज्य स्वामी मुरलीधर जी महाराज एवं देश विदेश से आये गणमाण्य अतिथि उपस्थित थे।
आज परमार्थ निकेतन में यारो का ताशान सीरियल के अभिनेता अनिरूद्ध दवे पहुंचे। उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री दवे ने परमार्थ गंगा आरती एवं यज्ञ में सहभाग किया। पूज्य स्वामी जी ने अनिरूद्ध दवे को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और कहा कि अपनी शक्ति व चिंतन को माँ धरती एवं माँ गंगा की सेवा में भी लगाये। श्री दवे ने कई टीवी सीरियल में यादगार एवं महत्वपूर्ण भूमिकायें अदा की है।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से नदियों एवं जल स्रोतों के संरक्षण का आहृवान किया। उन्होने कहा कि नदियाँ हमारी जीवनरेखा हैं; प्राणवाहिनी हैं। जिसप्रकार रूधिर वाहिनियां शरीरतंत्र के सन्तुलन को बनाये रखती हैं उसी प्रकार नदियों में राष्ट्र का प्राणतत्व समाहित होता है। नदियां अविरल रहेंगी तो देश आबाद और समृद्ध होगा। पूज्य स्वामी जी ने भगवान श्री राम के चरित्र का वर्णन करते हुये कहा की प्रभु श्री राम ने अपने चरित्र से हमें जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होने विश्व एक परिवार एवं संयुक्त परिवार की श्रृंखला को जन्म दिया है। प्रभु ने हर रिश्ते को दिल से जीना सिखाया है। आज हम रिश्तों को भी किस्तों में जीने लगे हैं। हमें रिश्तों में जीवन को जीना है तभी हम वसुधैव कुटुम्बकम के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हमारा जीवन सादगी से पूर्ण हो; व्यवहार में सरलता हो; वाणी में कोमलता हो; सहज और निर्मल मन हो तभी हम ’विश्व एक परिवार’ का निर्माण कर सकते हैं। विश्व बाजार नहीं परिवार है इसलिये हमें परिवार की प्रतिष्ठा और मूल्यों के लिये जीना चाहिये; सत्ता के लिये नहीं सत्य के लिये जीना चाहिये।’
पूज्यपाद स्वामी धर्मदेवजी महाराज ने कहा, ’भगवान राम ने व्यक्ति के विचारों से दूर्गुणों को हटा कर सत्य की स्थापना की थी। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज भी लोगों की सोच में पर्यावरण एवं नदी संरक्षण के अंकुर को डालने का कार्य प्राणपण से कर रहे हैं। आज हम परमार्थ गंगा तट पर हरित चुनरी महोत्सव मना रहे हैं। यह माँ गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की अद्भुत पहल है। उन्होने पूज्य स्वामी जी को श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ को पर्यावरण के प्रति समर्पित करने के लिये साधुवाद दिया और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में अपना सहयोग प्रदान करने का आहृवान किया।
गौ प्रेमी पूज्य स्वामी राधेश्याम जी महाराज ने कहा, ’ठाकुर जी ने अपनी लीला के माध्यम से
को संरक्षित करने का संदेश प्रेषित किया है। आज हमारी नदियां, पर्वत, गौ माता और बेटियां असुरक्षित है। अतः हम सभी का प्रथम कर्तव्य है कि हम प्रभु के गुणानुवाद के साथ अपने कर्तव्यों पर भी ध्यान दे। पूज्य स्वामी जी द्वारा उठायी स्वच्छता क्रान्ति की मशाल को थामे और उसे जन-जन तक ले जाने का संकल्प लें।’
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा पूज्य स्वामी धर्मदेवजी महाराज को भेंट किया एवं उपस्थित सभी को पर्यावरण एवं नदी संरक्षण का संकल्प कराया।
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