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जहां गूंजती है राम नाम सत्य की आवाज़ वहां हुआ जन्मोत्सव का आगाज़

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जहां गूंजती है राम नाम सत्य की आवाज़ वहां हुआ जन्मोत्सव का आगाज़
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जहां गूंजती है राम नाम सत्य की आवाज़ वहां हुआ जन्मोत्सव का आगाज़

झुंझुनूं, २९ जून; श्मशान घाट से रोने की नहीं गानों और ढोल नगाड़े की आवाजें आ रही थी. राम-नाम सत्य की ध्वनि नहीं जय जय गुरुदेव के आवाजें सुनाई दे रही थीं. जी हां ऐसा पहली बार हो रहा था जिस जगह हम शरीर का अंतिम क्रियाकरम यानि अंतिम संस्कार करते हैं वहां किसी का जन्मदिवस मनाया जा रहा था. देश के जाने माने क्रांतिकारी जैन संत तरूण सागर जी का सोमवार को 50वां जन्मदिन कुछ इसी अंदाज में झुंझुनूं के उदयपुरवाटी स्थित श्मशान घाट पर मनाया गया. जिसमें उनके भक्तों के अलावा उदयपुरवाटी विधायक शुभकरण चौधरी और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री पूजा कपिल सहित अन्य लोगों ने शिरकत की. जैन संत तरूण सागर ने कहा कि भगवान महावीर का कहना है कि मौत महात्म्य नहीं, बल्कि महोत्सव है.
जैन संत तरूण सागर जी का  50वां जन्मदिन कुछ इसी अंदाज में झुंझुनूं के उदयपुरवाटी स्थित श्मशान घाट पर मनाया गया.
ऐसे में इस संदेश का प्रचार प्रसार करने के लिए यह कार्यक्रम किया है और आज के दिन 50 अन्य लोगों ने भी अपना एक जन्मदिन श्मशान घाट में मनाने का संकल्प लिया है. यह संकल्प पूरे देश और विदेशों में फैलेगा. कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए उनके 50 भक्तों ने अपना एक जन्मदिन श्मशान में मनाने का संकल्प लिया. इसके अलावा उपस्थित सभी जनों ने एक-एक पौधा लगाकर उसकी सार संभाल का संकल्प भी लिया. संकल्प लेने वाले भक्तों ने बताया कि तरूण सागर जी के प्रवचन कड़वे तो जरूर होते है. लेकिन जिंदगी के सच भी होते है.

एक जन्मदिन श्मशान घाट में मनाने का संकल्प लिया है
यही कारण है कि उनका यह संकल्प आज 50 जनों से शुरू हुआ है. आने वाले दिनों में यह सभी जगहों पर पहुंचेगा और लाखों लोग इस संकल्प से जुड़कर समाज को नई दिशा देंगे. वैसे तो शास्त्रों में श्मशान भूमि पर जाने में महिलाओं को वर्जित है. लेकिन इस कार्यक्रम में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया और करीब दो घंटे तक तपती गर्मी और उमस के बीच श्मशान भूमि पर ही उनके प्रवचन सुने और उन्हें आत्मसात किया. महिलाओं ने बताया कि आज का कार्यक्रम अनूठा होने के साथ-साथ सारगर्भित भी है. आज के कार्यक्रम का एक ही संदेश है कि खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है. श्मशान जीवन का एक बड़ा सत्य है. जिसका सामना करना बेहद जरूरी है.

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By Religion World June 29, 2017 3 min read
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