[vc_row][vc_column][vc_column_text title=”लोग कथा में क्यों आते हैं?”]कथा में लोग इसलिए आते हैं और घंटों तक जागृतिपूर्वक बैठते हैं, कहीं न कही कथा उसकी व्यथा को कम कर रही है और दबी हुई प्रसन्नता प्रकट करती है। केवल व्यथा बोली नहीं जा रही, वो घटती जा रही है। [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=”आपने कथा करने की क्यों सोची”]
[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=” कथा में वक्त के साथ क्या परिवर्तन आ रहे हैं”]
[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=”कथा के सकारात्मक प्रभाव “]कथा सुनने के बाद लोग खासकर युवक सत्य के समीप जा रहे हैं. लोग सच्चे प्रेम को समझने लगे है, मानो किसी को कहे बिना भीतर से संकल्पित होते जा रहे हैं. [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=” कथाओं में क्या बहुत संसाधनों का प्रयोग हो रहा है”]जितना जरूरी है वो तो करना पड़ता है। लाउडस्पीकर की व्यस्था, दुनिया के १७० देशों में कथा जा रही है, सो लाइव टेलीकास्ट जरूरी है। पंडाल बनाना जरूरी है। मैं अनावश्यक खर्चे के पक्ष में नहीं हूं, मैं जब किसी को कथा देता हूं तो दबाव डालकर कहता हूं कि एक पैसा भी अकारण खर्चा न करें, कथा कोई रिसेप्शन नहीं है। कथा में हमारे यहां सौराष्ट्र-गुजरात से लेकर पूरे देश में भंडारा चलता है, लोगों को भोजन परोसा जाता है। कथा के साथ बहुत सामाजिक प्रवृत्तियां होती हैं, एक कथा में कई लोगों का गुजारा चलता है, कथा से कई लोगों का भौतिक और आध्यात्मिक फायदा हो रहा है। [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=”क्या आप कथा करने का शुल्क लेते हैं”]नहीं मैं कथा करने का कोई शुल्क नहीं लेता, लोग मुझे लेने आते हैं बस। [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=”आपकी कथा से किसी खास के जीवन में बदलाव आया हो”]इसी रविवार को मेरी बातें सुनकर नलसरोवर में विदेशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों को कभी न मारने का संकल्प लिया। ये कथा का असर है। शिकारियों ने संकल्प लिया कि वे कभी किसी को नहीं मारेंगे। [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=”कथा का भविष्य क्या है”]कथा रहेगी और टिकेगी. हरि अनंत और हरि कथा अनंता। कथा हमेशा रहेगी। [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text title=”क्या आप कथावाचकों की कोई परंपरा बना रहे हैं, अपने बाद”]कथा स्वयंभु होती है, मेरी कोई परंपरा नहीं है। मैं प्रवाहमान परंपरा में यकीन रखता हूं। [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row]
Editorial Review Note
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