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भारत में पहली बार सांकेतिक भाषा में पढ़ी जाएगी जुमा की नमाज़

भारत में पहली बार सांकेतिक भाषा में पढ़ी जाएगी जुमा की नमाज़

भारत में पहली बार सांकेतिक भाषा में पढ़ी जाएगी जुमा की नमाज़
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भारत में पहली बार सांकेतिक भाषा में पढ़ी जाएगी जुमा की नमाज़

किसी भी मस्जिद में अज़ान होने के बाद नमाज़ पढ़ी जाती है लेकिन अब भारत में ऐसी मस्जिद का निर्माण हुआ है जहां मूक और बधिर भी सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल करके जुमा की नमाज़ अता कर सकेंगे. यह मस्जिद मल्लपुरम के पुलिक्कल में स्थित अल-रहम मस्जिद है, जहां मूक-बधिरों के लिए खास सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इस मस्जिद का उद्घाटन 22 मई को किया गया. इस मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान होने वाले खुतबा को मूक-बधिरों सांकेतिक भाषा में अनुवाद किया जाएगा. इसी तरह से हर नमाज के दौरान दिए जाने वाले धर्मोपदेश के लिए भी संकेतों की भाषा के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी. इस मस्जिद में एक साथ पांच सौ लोग नमाज पढ़ सकते हैं. किसी को देखने में दिक्कत न हो इसके लिए मस्जिद की दीवारों पर एलसीडी स्क्रीन भी लगा दी गई हैं.
अबिलिटी फाउंडेशन नाम के एनजीओ के चेयरमैन मुस्तफा मदनी के अनुसार, जुमे की नमाज के दौरान दूसरी तरह की शारीरिक अक्षमताओं वाले लोग तो धार्मिक उपदेशों का लाभ उठा पाते हैं, लेकिन जिन लोगों के पास सुनने की क्षमता नहीं है वे वंचित रह जाते हैं. मस्जिद के शौचालयों में रैंप्स, आर्म रेस्ट्स भी लगाए गए हैं साथ ही वील चेयर्स का भी बंदोबस्त किया गया है.
मदनी ने बताया कि उन्हें इस मस्जिद को बनाने का आइडिया तब आया जब उन्हें पता लगा कि जो स्टूडेंट सुन नहीं सकते वे जुमे की नमाज और प्रार्थना सभा सिर्फ इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें धर्मोपदेश का पालन करने में दिक्कत आती है. इस मस्जिद का निर्माण अक्टूबर 2016 में ही शुरू हो गया था। मस्जिद को बनाने में 75 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

RW

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By Religion World May 23, 2017 2 min read
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