अजमेर, २५ मई. क्या आपको पता है अजमेर,भारत में दिगम्बर जैन मंदिर (सोनी जी की नसिया) है जो पूरी तरह से स्वर्ण का बना हुआ है. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में एक हज़ार किलो सोने का इस्तेमाल हुआ है. नासिया मंदिर जिसे लाल मंदिर भी कहा जाता है, इसका निर्माण १८६५ में हुआ था और यह अजमेर में पृथ्वीराज मार्ग पर स्थित है। मंदिर की संरचना दो मंजिली है जो प्रथम जैन तीर्थांकर भगवान आदिनाथ को समर्पित है.
दो भागों में है भवन
भवन दो भागों में निर्मित है: एक भाग जो पूजा का क्षेत्र है जहाँ भगवान आदिनाथ की मूर्ति है और दूसरे भाग में एक हॉल है जहां संग्रहालय है. ( स्वर्ण जैन मंदिर )

संग्रहालय में क्या है खास
संग्रहालय की आंतरिक संरचना सोने की बनी हुई है और यह भगवान आदिनाथ के जीवन के पांच चरणों जिन्हें पंच कल्याणक कहा जाता है, को दर्शाती है. इसका क्षेत्र ३२०० वर्ग फुट है और यह बेल्जियम के रंगीन कांच, खनिज रंगों और रंगीन कांचों से सुसज्जित है.
इसके केंद्र में एक कक्ष है जो सोने और चांदी से सुसज्जित है और इसे “गोल्डन टेंपल” (स्वर्ण मंदिर) भी कहा जाता है. इस मंदिर में लकड़ी पर सोने का काम, कांच की नक्काशी और पेंटिंग भी देखने को मिलती है. यह मंदिर “सोनी जी की शय्या” नाम से भी प्रसिद्ध है. इस मंदिर का नाम ऐसा इसलिए पड़ा क्योंकि यह मूल्यवान पत्थरों, सोने और चांदी से सजा हुआ है.
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