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आदिवासी बच्चों की आस बनी राधे मां

आदिवासी बच्चों की आस बनी राधे मां

आदिवासी बच्चों की आस बनी राधे मां
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आदिवासी बच्चों की आस बनी राधे मां

राधे मां, जिनके भक्तों के लिए वे एक आध्यात्मिक शक्ति जैसी है। वे धर्म से जुड़ी एक शख्सियत हैं, जिनको लेकर हमआप कम ही जानते हैं। रिलीजन वर्ल्ड की कोशिश है कि धर्म के जरिए जहां भी अच्छा या समाज की संरचना का काम हो रहा है, उसे पेश किया जाए।

राधे मां की लोकप्रियता के साथ साथ आज हम उनके द्वारा किए जाने वाले बड़ा धार्मिक कार्यक्रमों के बारे में तो जान जाते हैं, पर उनकी एक कोशिश अभी भी जानकारी से दूर मदद के तौर पर एक बड़ा काम कर रही है। रोचक ये है कि ये कोशिश कई सालों से जारी है, उनके लोकप्रिय होने के पहले से। सिलवासा में बने इस आदिवासी आश्रमशाला के बच्चों के लिए राधे मां एक ममतामयी महिला है। वे उनके आने पर खुश हो जाते हैं और उन्हें इंतजार रहता है उस मदद का जिनसे उनकी जिंदगी संवरनी है।

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बीते शुक्रवार यानि 28 जुलाई को राधे मां सिलवासा के पालघर जिले के परली स्थित आदिवासी आश्रमशाला पहुंची। सिलवासा के आदिवासी आश्रमशाला के अनाथ बच्चों के लिए कुछ तोहफे लेकर।

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आश्रमशाला के 741 बच्चों को पुस्तकों और नोटबुक्स की किट मुहैय्या करायी और साथ ही उन बच्चों को खाने पीने की सामग्री भी दी। उन्होंने आदिवासी आश्रमशाला के 741 बच्चों का मुफ्त बीमा करने का भी आश्वासन दिया।

इसके उपरान्त उन्होंने शाला के प्रधानाचार्य अशोक पाटिल के साथ शाला में हो रहीं परेशानियों को जाएजा लिया और साथ ही सभी गंदे पड़े कुओं की साफ़ सफाई का भी जिम्मा लिया। राधे मां पिछले कई वर्षों से इस आदिवासी पाठशाला को अपना सहयोग देती आ रही है।

 

इस स्कूल में करीब 741 गरीब बच्चे पठान पाठन करते हैं जिनमे से 442 बच्चे छात्रावास में रहते हैं। छात्रावास के सभी बच्चों के रहने और खान पान के खर्च का वहन राधे मां की ओर से ही होता है। स्कूल के प्रधानाचार्य अशोक पाटिल का कहना है कि ऐसा नहीं है कि सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं आती… लेकिन उनकी मदद ऊँट के मुंह में जीरे के समान ही होती है. ऐसे में राधे मां का सहयोग से बच्चों और यहाँ के कर्मचारियों में ओज भर देता है।

 

राधे मां ने इस दौरान वहां उपस्थित बच्चों के साथ समय बिताया और यह भी वादा किया कि अगले वर्ष से वह शाला के सभी 741 बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस बनवा कर लायेंगी।

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By Shweta July 31, 2017 3 min read
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