इस मंदिर में होती है हर धर्मो की उपासना होती है
आज जहां धर्म के नाम पर हत्याएं और भीड़ का आक्रोश बढ़ रहा है वहीँ धनबाद में एक ऐसा मंदिर है जहाँ सभी धर्मों के लोग अपना माथा झुकाते हैं. कोयलांचल में बना यह मंदिर ब्रिटिश काल में बना मेसोनिक टेम्पल अब प्रशासन के अनदेखी के चलते अब भूत बंगला के नाम से जाना जाता है. सौ साल पहले बने इस मंदिर में एक साथ हिंदू, मुसलमान, पारसी, ईसाई और सिख इबादत करते हैं
1917 ई में हुई थी स्थापना
धनबाद शहर के लुबी सर्कुलर रोड पर मेसोनिक टेंपल है जिसे चार अक्टूबर 1917 ई में तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी कर्नल डी एच डियरे ने स्थापित किया था. तब अलग अलग धर्म और पंथ को मानने वाले लोगों में धार्मिक भाई चारा बढ़ाने और एक साथ उपासना के उदेश्य से इस मंदिर की नीव रखी गई थी.
पहले केवल अंग्रेज होते थे हेड
मेसोनिक टेंपल के सीनियर वार्डेन केसरी सिन्हा ने बताया कि आजादी से पहले से मेसोनिक टैम्पल के हेड सिर्फ अंग्रेज़ होते थे. लेकिन लेकर स्वतन्त्रता मिलने के बाद इसके प्रमुख भारतीय चुने गए. वैसे इस मंदिर मे अभी भी पवित्र धार्मिक ग्रंथ श्रीमद भागवदगीता, कुरान ,बाईबिल, जेंदावास्ता और गुरुग्रंथ साहेब की किताब रखी हुई है. और अलग अलग धर्मो के सभी 23 सदस्य एक साथ उपासना के लिए पहुँचते है.

मिट रहा अस्तित्व
मेसोनिक टेंपल के वरशिप मास्टर आरके करण ने बताया कि कोयला खदानों में वर्षो पूर्व इस्तेमाल होने वाले डेविड लैम्प इस मंदिर की प्रतीक चिन्ह है. जिसका मतलब अंधेरे में रोशनी की किरण होती है. 100 वर्ष पुरानी मेज कुर्सिया और दीवारों पर टंगे अँग्रेजों की निशानी अब दीमकों और मकड़ी के जाले कि बीच अपनी अस्तित्व तलाश रही है.
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12 वीं शताब्दी में मिलता उल्लेख
मेसोनिक टेंपल का इतिहास काफी पुराना है. मेसोनिक टेंपल धनबाद के पास्ट मास्टर विजय ईलाबादी कहते हैं कि इसका उल्लेख 12 वीं शताब्दी के किंग्स सोलोमन के समय में मिलता है. हालांकि ब्रिटिश काल मे यूरोप से मेसोनिक मंदिर कि शाखाएं भारत में स्थापित हुईं.

नामी हस्तियां जुड़ीं
धनबाद के इस 100 साल पुराने मेसोनिक टेंपल के वार्डेन तत्कालीन अंग्रेज़ कलक्टर लुबी सर्कुलर भी रह चुके हैं. इनके नाम पर शहर कि प्रमुख सड़क है. यहाँ तक कि विवेकानन्द और भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जैसे महान लोग किसी ना किसी मेसोनिक शाखा के सदस्य रह चुके हैं.
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अब मेसोनिक टैम्पल अब जर्जर हो गया है. इस मंदिर को जीर्णोद्धार की ज़रुरत है. लेकिन इसके लिए कोई आगे नहीं आया है. देखरेख के अभाव मे जहां भवन टूटने लगे हैं, वहीं इसकी कीमती जमीन को हड़पने के लिए भूमाफिया लगे हुए हैं.
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