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करवाचौथ: जानिये कैसे शुरू हुई व्रत की परंपरा

करवाचौथ: जानिये कैसे शुरू हुई व्रत की परंपरा

करवाचौथ: जानिये कैसे शुरू हुई व्रत की परंपरा
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करवाचौथ: जानिये कैसे शुरू हुई व्रत की परंपरा

करवाचौथ: जानिये कैसे शुरू हुई व्रत की परंपरा

करवाचौथ पति-पत्नी के आपसी प्रेम और समर्पण का त्योहार है. सब लोग ये तो जानते हैं कि पत्नी द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखा जाता है लेकिन क्या आपको पता है सबसे पहले किसने किया था करवा चौथ का व्रत. आइए आपको बताते हैं इसके बारे में….

छांदोग्य उपनिषद के अनुसार करवाचौथ पर चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. इससे जीवन के सभी तरह के कष्टों का निवारण तो होता ही है साथ ही लंबी उम्र भी प्राप्त होती है.

माना जाता है कि इस व्रत के समान सौभाग्य प्रदान करने वाला व्रत अन्य दूसरा नहीं है. माता पार्वती ने कठिन तप से भगवान शिव को प्राप्त किया और अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था. इसलिए इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है. महाभारत में पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी द्वारा भी इस व्रत को रखा गया था.

यह भी पढ़ें-करवाचौथ पर रखें कौन सी सावधानियां : उपनिषद-पुराणों में करवाचौथ व्रत

अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन विवाहिताएं, भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और निर्जल व्रत रखती हैं. यह प्रथा सदियों से चली आ रही है. एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ और देवताओं की हार होने लगी. देवता, भगवान ब्रह्मा की शरण में गए तो उन्होंने सुझाव दिया कि सभी देवताओं की पत्नियों को अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और उनकी विजय के लिए प्रार्थना करें.

कार्तिक माह में चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा. उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की विजय हुई. माना जाता है कि इसी दिन से करवाचौथ के व्रत की परंपरा शुरू हुई. इस व्रत को रखने वाली महिला काले और सफेद कपड़े नहीं पहनें. लाल और पीले वस्त्र धारण करें. इस दिन विवाहित महिलाओं को पूर्ण शृंगार करना चाहिए.

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By Shweta October 7, 2017 3 min read
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