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मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की मांग की

मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की मांग की

मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की मांग की
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मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की मांग की

मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की मांग की

 बनारस में प्रभु श्रीराम की आरती को लेकर जारी फतवे के खिलाफ मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने मोर्चा खोल दिया है. एक बार फिर श्रीराम को अपना पूर्वज बताते हुए फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट से मांग की है.

दिवाली के मौके पर मुस्लिम महिला फाउंडेशन की ओर से आयोजित किए जाने वाले महाआरती कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाएं प्रभु श्रीराम की आरती उतारती हैं. इस बार भी दिवाली के मौके पर बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं ने आरती उतार संदेश दिया था. इससे नाराज मदरसा दारूल जकारिया देवबंद के मौलाना मुफ्ती शरीफ खान ने अल्लाह के सिवाए किसी और की आरती या पूजा करने को गलत ठहराते हुए ऐसा करने वाली महिलाओं को खुद ब खुद इस्लाम से बाहर होने का फतवा सुना दिया.

मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी का कहना है कि हमने इस्लाम धर्म से इतर कोई काम नहीं किया है. भारतीय संस्कृति में अतिथि का सत्कार तिलक लगा, माला पहना और आरती कर किया जाता है. हम श्रीराम को अपना पूर्वज मानते हैं. कोई भी व्यक्ति अपना धर्म, जाति बदल सकता है पर अपने पूर्वजों को नहीं.

यह भी पढ़ें – आरती करने वाली मुस्लिम महिलाएं इस्लाम से खारिज: देवबंद उलेमा

उन्होंने कहा कि इसी बात को मानते हुए हमने भगवान श्रीराम के चित्र के समक्ष दीप जलाया और आरती कर उनका स्वागत किया. यदि दारूल उलूम ने इस्लाम धर्म का ठेका लेने की खुद को एजेंसी बना रखा है तो हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसी एजेंसी को फौरन बंद कराए.

वर्चस्व खत्म हो रहा तो जारी कर रहे फतवा

नाजनीन अंसारी ने कहा कि फतवे को लेकर हम आक्रोशित नहीं हैं बल्कि गलत बयान जारी करने वालों पर हमे हंसी आती है. उन्होंने कहा कि ये इस्लाम को पैगम्बर साहब की तरह न चलाकर अपने हिसाब से चलाना या उसे बदलना चाहते हैं. फतवा इसलिए जारी किया गया कि इनका वर्चस्व खत्म हो रहा है. इस्लाम ने हमेशा सभी धर्मों का आदर करना सिखाया है. हम वही कर रहे हैं और करते रहेंगे.

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By Shweta October 22, 2017 3 min read
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