विधि विधान से ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य बनें स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज




शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज आज से ज्योतिषपीठ की जिम्मेदारी फिर से संभाल ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद द्वारका, श्रंगेरी और पुरी मठ के शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों के अलावा वाराणसी से भारतधर्म मंडल काशी विद्वत परिषद के प्रतिनधियों द्वारा स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आश्रम परहँसी गंगा आश्रम पहुंच कर विधि विधान से पूजन अर्चन उपरांत स्वरूपानंद सरस्वती महाराजजी का अभिषेक कर आज उन्हें फिर से ज्योतिषपीठ मठ की जिम्मेदारी दे दी।


नरसिंहपुर के झोंतेश्वर स्थित परमहंसी आश्रम शंकराचार्य की तपोभूमि स्थल हैं, जहाँ त्रिपुरसुंदरी राज राजेश्वरी देवी एवम चौसठ योगिनी का भव्यमन्दिर है। इसी मंदिर में पूरी भव्यता और धार्मिक माहौल के बीच पहले स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के चरणों का प्रक्षालन हुआ| इसके बाद देवी दरवार में जगदम्बा का पाट्य प्रकोत्सव सम्पन्न हुआ। शकराचार्य के रूप में संत महात्माओं की उपस्थिति के बीच स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का विधि विधान पूजन अर्चन हुआ| इस दौरान पूर्व और पश्चिम दिशा के दोनों समुद्र का जल गंगा यमुना सरस्वती के संगम का जल अलकनंदा और अमरनाथ के जल से स्वरूपानन्द सरस्वती का अभिषेक कर शंकराचार्य के रूप में विराजित किया गया।

सनातन धर्म मे मान्यता है कि विद्वान और शास्त्रों के परम ज्ञाता जिस संत को ये उपाधि दी जाती है, उनका इसी तरह मन्त्रों से परिमार्जित जल से अभिषेक किया जाता है जिनसे वे दैवीय शक्ति को प्राप्त हो और धर्म के उत्थान के लिए वो अलख जगा सके। स्वामी स्वरूपानन्द अब द्वारका पीठ के अलावा ज्योतिष पीठ के भी शंकराचार्य होंगे। इस मौके पर उन्होने सभी को शुभकामनाएं देते हुए प्रवचन भी दिए।




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