हमारे पूर्वजों का देश है भारत: विदेशियों ने याद की असली संस्कृति

जयपुर में आयोजित इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चर स्टडीज के कार्यक्रम में 8 देशों के प्रतिनिधियों ने एक–दूसरे की संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा की।कार्यक्रम में शामिल कई देशों के डेलीगेट्स ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि उनके पूर्वज हजारों सालों पहले भारत से ही जाकर बसे थे। यही वजह है कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताएं उनके लिए सदैव पूज्य हैं।

विदेशी मेहमानों ने धर्म और आध्यात्म के सबसे बड़े आयोजन कुंभ मेले को लेकर भी अपने विचार और अनुभव साझा किए। आयोजन में कोलंबिया, अमेरिका, रूस, कनाडा, फिलीपींस, इराक, लेटविया और अर्मेनिया के प्रतिनिधि शामिल थे जिनमें कई ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें वेद–पुराण और श्लोकों का गहरा ज्ञान है। इसपर देवस्थान राज्यमंत्री राजकुमार रिणवा ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल सभी मेहमान भारतीय संस्कृति से बेहद प्रभावित हैं और यह भारत के लिए गौरव का विषय है।युवाओं को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।रिणवा ने कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की मिसाल है जिसमें संपूर्ण विश्व को एक परिवार माना गया है।


कार्यक्रम में इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चर स्टडीज के संयोजक सुरेंद्र नारायण माथुर और देवस्थान विभाग के सचिव के के पाठक भी शामिल हुए जिन्होंने बताया कि कई देशों का सांस्कृतिक–धार्मिक साहित्य, पूजा–पाठ का तरीका और देवी–देवता भी किसी ना किसी रूप में मिलते–जुलतेहैं।कई यूरोपीय देशों में भगवान कल्कि की पूजा की जाती है।
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रिपोर्ट – देवेन्द्र शर्मा, जयपुर
ईमेल – sharmadev09@gmail.com
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