आध्यात्मिक कहानी : जीवन का सत्य
प्रतिदिन की तरह भगवान बुद्ध भक्तों को उपदेश दे रहे थे। तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला, ‘भगवन ! लोग शांति चाहते हैं, पर चारो ओर शांति कहीं नहीं है। उन्हें शांति नहीं मिलती क्यों?’ बुद्ध ने मुस्कुराते हुए विनम्रता से जवाब दिया, ‘ऐसा तुम्हें लगता है. यह तुम्हारा भ्रम है. लोग शांति चाहते ही नहीं.’
बुद्ध से उस व्यक्ति को कैसे जवाब की उम्मीद नहीं थी. उसने तुरंत उत्तर दिया, यह आप क्या कह रहे हैं? हर व्यक्ति शांति का भूखा है और हर पल उसकी खोज में ही लगा रहता है।’ उस समय आश्रम में बहुत भीड़ थी. लोग बैठकर बुद्ध और उस व्यक्ति के बीच के वार्तालाप को सुन रहे थे।
तभी बुद्ध ने एक आदमी को बुलाकर पूछा, कहो भाई, तुम क्या चाहते हो?’ वह व्यक्ति बोला, ‘भगवन, मेरा परिवार काफी बड़ा है. आमदनी कम है और हर समय धन के लिए किल्लत मची रहती है. बस कुछ धन मिल जाए, तो जीवन सुखी हो जाए.’
तब बुद्ध ने पहले आदमी से कहा, ‘देखो, शांति कोई नहीं चाहता. सबकी अपनी अपनी इच्छाएं और आवश्यकताएं हैं, उन्हीं की पूर्ति कि वह हर पल कामना करते हैं.’ यह कहकर बुद्ध चुप हो गए। वह व्यक्ति भी चुपचाप चला गया। उसके सामने जीवन का सत्य उजागर हो गया था।
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