आयुर्वेद पर शोध करवा रही है भारत सरकार
भारत की अमूल्य धरोहर आयुर्वेद को लेकर भारत सरकार अब तेजी से काम कर रही है। हाल ही में आयुर्वेद में नई दवाओं की तलाश के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने एक ठोस कदम उठाया है। देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के विशेषज्ञों के संग केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने शोध का काम शुरू कर दिया है। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपाद नाइक ने इस विषय पर जानकारी भी दी।

राज्यसभा में श्रीपद नाइक ने बताया था कि डायबिटीज के टाइप-2 मरीजों के लिए आयुर्वेद में औद्योगिक अनुसंधान परिषद और वैज्ञानिकों ने बीजीआर- 34 नाम की दवा विकसित की है। ये बाजार में उपलब्ध है। ये दवा हर्बल है और दो प्रयोगशालाओं के साझा प्रयास से बनी हैं। न्यूज एजेंसी IANS ने बताया कि, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स और नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ में स्थित हैं. इन दोनों संस्थाओं ने हाइपोग्लाइसेमिक नुस्खा एनबीआरएमएपी-डीबी तैयार किया है. वहीं इसका व्यावसायिक लाइसेंस एमिल फार्मा लिमिटिड, दिल्ली को दिया गया है. यही कंपनी इसका निर्माण और वितरण कर रही है.
वैज्ञानिक रावत का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज वयस्कों में सामान्यतः उनकी जीवनशैली की वजह से होता है, जबकि टाइप-1 डायबिटीज अनुवांशिक होता है. रावत ने आगे बताय कि आयुर्वेद में वर्णित 500 जड़ी-बूटियों पर गहन अध्ययन और शोध के बाद अंततः छह सर्वश्रेष्ठ का चयन किया गया. दारूहरिद्रा, गिलोय, विजयसार और गुड़मार आदि का चयन मधुमेह के इलाज में इनके प्रभाव को देखते हुए किया गया है.
रावत के मुताबिक़ मुताबिक, डायबिटीज के पुराने और गंभीर मामलों में इसका उपयोग मुख्य इलाज के साथ एडजंक्ट थेरेपी के लिए किया जा सकता है क्योंकि इसे लीवर और किडनी के लिए अनुकूल प्रभाव पैदा करने वाला और साथ ही वसा असंतुलन को रोकने वाला पाया गया है.
बता दें कि डायबिटीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोदी सरकार ने 2016 में ‘मिशन मधुमेह’ शुरू किया था, जिसके तहत आयुर्वेद के माध्यम से बचाव और नियंत्रण के लिए मसौदा तैयार किया जा रहा है.
(Source-IANS)
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