RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

शिव के 12 ज्योतिर्लिंग – भोलेनाथ के दिव्य स्थान

शिव के 12 ज्योतिर्लिंग – भोलेनाथ के दिव्य स्थान

शिव के 12 ज्योतिर्लिंग – भोलेनाथ के दिव्य स्थान
Visual Archive

शिव के 12 ज्योतिर्लिंग – भोलेनाथ के दिव्य स्थान

शिव के 12 ज्योतिर्लिंग – भोलेनाथ के दिव्य स्थान

12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के वो 12 स्थान है जहां भगवान शिव स्वयं ज्योति रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि बारह ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करने वाला प्राणी सबसे भाग्यशाली होता है। आइए जानते हैं भगवान शिव के उन्हीं 12 स्थानों के बारे में, जिनके दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है ।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 

गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मान्यता है कि जब चन्द्रमा को दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया था. तब चन्द्रमा ने इसी स्थान पर तप कर श्राप से मुक्ति पाई थी। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। विदेशी आक्रमणों के कारण इस मंदिर का स्वरुप लगातार बदलता रहा है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग


मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है और दैहिक, दैविक और भौतिक ताप नष्ट हो जाते हैं।

महाकालेश्वर


यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती दुनिया भर में प्रसिद्ध है। महाकाल को उज्जैन का राजा भी माना जाता है।

ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता पर्वत पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस वजह से इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इनके दर्शन से व्यक्ति को चारों पुरुषार्थ यानि धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

केदारनाथ 

ये ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। कैलाश पर्वत की तरह ही केदार क्षेत्र भी शिव को अत्यंत प्रिय है। केदारनाथ क्षेत्र बद्रीनाथ मंदिर के मार्ग में स्थित है।

रामेश्वर


रामेश्वर ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथपुरं में स्थित है। ये स्थान हिंदुओं के चार धामों में से भी एक है। मान्यता है कि लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान राम ने इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी, इसलिए इसे रामेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं

यह भो पढ़ें-सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने का तरीका

भीमाशंकर

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।

काशी विश्वनाथ  


ये ज्योतिर्लिग उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है। वाराणसी को काशी भी कहा जाता है। काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थान रखती है। पुराणों के मुताबिक भगवान शिव ने कैलाश को छोड़कर काशी को ही अपना स्थायी निवास बनाया था। मान्यता है कि प्रलय काल का इस नगरी पर कोई असर नहीं पड़ता है।

त्र्यंबकेश्वर 

त्र्यबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है। कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रुप में स्थापित होना पड़ा

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग 

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर जिले में है। धर्म ग्रथों के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना रावण ने की थी । इस स्थान को देवघर यानि देवताओं का घर कहते हैं । इस ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग भी कहते हैं

नागेश्वर

नागेश्वर ज्योतिर्लिग गुजरात के द्वारका में स्थित है। भगवान शिव का एक नाम नागेश्वर भी है। इस ज्योतिर्लिग के बारे में मान्यता है कि शिव की इच्छानुसार ही इसका नामकरण किया गया है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से इसके दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के दौलताबाद में है । इसे घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 18 वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर के द्वारा करवाया गया था। रुद्रकोटिसंहिता, द्वाद्श ज्योतिर्लिंगस्तोत्रं के अनुसार ये ज्योतिर्लिंग बारहवें और अंतिम क्रम पर आता है

रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

 

 

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta July 15, 2019 4 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

सोमनाथ 1000 वर्ष महोत्सव: आस्था, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना का ऐतिहासिक संगम

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – देश के सम्मान का महोत्सव सोमनाथ (गुजरात): भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने…

Read now
Hinduism

भारत के सबसे शक्तिशाली मंदिर कौन-कौन से हैं?

भारत के सबसे शक्तिशाली मंदिर कौन-कौन से हैं? भारत एक ऐसा देश है जिसकी रगों में आध्यात्मिकता बहती है। यहाँ के मंदिर सिर्फ पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि…

Read now
Hinduism

मृत्यु के बाद आत्मा 13 दिनों तक क्या करती है? – पुराणों की व्याख्या 

मृत्यु के बाद आत्मा 13 दिनों तक क्या करती है? – पुराणों की व्याख्या  मृत्यु मानव जीवन का सबसे गहरा और रहस्यमय अनुभव है। शरीर रुक जाता है,…

Read now