वृंदावन में गुरूनानक जी की 550 वीं जयंती समारोह का आयोजन
- उदासीन कार्ष्णि आश्रम रमणरेती महाबन वृंदावन में गुरूनानक जी की 550 वीं जयंती समारोह का आयोजन
- स्वामी गुरूशरणानन्द जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज, स्वामी रामदेव जी महाराज, स्वामी महेश्वरदास जी महाराज, स्वामी ज्ञानदेव जी महाराज, श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी, बाबा हरनाम सिंह जी, स्वामी परमानन्द जी महाराज, स्वामी हंसाराम जी महाराज, स्वामी आत्माराम जी, स्वामी शांतानन्द जी महाराज, स्वामी उपेन्द्रदास जी महाराज दिगम्बर मुनी जी एवं अन्य पूज्य संतों ने किया सहभाग
- जो जोड़ता है वही धर्म है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
30 अक्टूबर, वृंदावन/ऋषिकेश। उदासीन कार्ष्णि आश्रम रमणरेती महाबन वृंदावन में गुरूनानक जी की 550 वीं जयंती के अवसर पर वन्दना एवं श्रद्धा सुमनाजंलि समारोह का आयोजन किया गया।

यह पावन कार्यक्रम उदासीन कार्ष्णि आश्रम रमणरेती महाबन वृंदावन के पीठाधीश्वर स्वामी गुरूशरणानन्द जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया जिसमें स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज, स्वामी रामदेव जी महाराज, स्वामी महेश्वरदास जी महाराज, स्वामी ज्ञानदेव जी महाराज, श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी, बाबा हरनाम सिंह जी, स्वामी परमानन्द जी महाराज, स्वामी हंसाराम जी महाराज, स्वामी आत्माराम जी, स्वामी शांतानन्द जी महाराज, स्वामी उपेन्द्रदास जी महाराज दिगम्बर मुनी जी एवं अन्य पूज्य संतों ने सहभाग किया।
इस समारोह का उद्देश्य भारत सहित विश्व के अन्य देशों में गुरूनानक देव जी के पावन संदेशों को पंहुचाना है। गुरूनानक देव जी ने ’पवन गुरू, पाणी पिता, माता धरति महत’ पर्यावरण, जल, वायु और धरती के संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही ’जपुजि साहिब’ में दुनिया को एक करने का संदेश प्रसारित किया है। लगभग 500 वर्ष पूर्व दिये संदेश वर्तमान और आगे वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जिन महापुरूषों ने समाज को जोड़ने का कार्य किया है उन्हे मेरा नमन। समाज को जोड़ना ही धर्म है। जो तोड़ता है वह धर्म हो नहीं सकता और जो जोड़ता है वही धर्म है। जो मूल से जोड़ता है; संस्कारों से; संस्कृति से आपनी सभ्यता से जोड़ता है वही धर्म का सच्चा स्वरूप है। स्वामी जी ने कहा कि हम सभी एक है एक परिवार है, हमारी वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति है। न कोई ऊँचा हो न कोई नीचा हो, न कोई छोटा हो न कोई बड़ा हो इन सारी बाते की उन्होेने अपने जीवन से शिक्षा दी।
स्वामी जी ने कहा कि सब समान है; सब महान है यह महान मंत्र है। व्यक्ति जीवन में ऊँचाई तो प्राप्त करें परन्तु वह ऊँचाई कैसी हो-वह अच्छाई लिये हो; सफाई लिये हो। जीवन में अच्छाई हो, कई बार हम बड़े तो बन जाते है परन्तु बढ़िया नहीं बन पाते। बाहरी चीजें आदमी को बड़ा नहीं बनाती जीवन मे मूल्य बड़ा बनाते है।

श्री हरनाम सिंह जी ने कहा कि गुरूनानक देव जी ने सम्पूर्ण मानव जाति, सभी धर्मो के लोगों और सभी धर्मो को सम्मान और स्नेह प्रदान किया। उन्होने जो संदेश और उपदेेेश दिये आज के समय में भी पूरी दुनिया में प्रसारित हो रहे है जिससे लोगों का मार्गदर्शन हो रहा है।
योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि आज समाज में चारों ओर धर्म के नाम पर; भगवान के नाम पर; जातियों के नाम पर पतन, घ्रणा, नफरत, द्वेष हो रहा है जो जहर फैला हुआ है इसको हम कम कर सके यही हमारा उद्देश्य हो।
Live- वन्दना एवं श्रद्धा-सुमनाञ्जलि समारोह, श्री उदासीन कार्ष्णि आश्रम, रमणरेती महावन।। गोकुल, मथुरा https://t.co/f9fIU37nH7
— स्वामी रामदेव (@yogrishiramdev) October 30, 2019
स्वामी अवधेशानन्द गिरी जी महाराज ने कहा कि गुरूनानक देव जी ने नाम जपो का मंत्र दिया। नारायण को जपने का मंत्र दिया। जो भगवान का स्मरण करते है वे सामर्थ प्राप्त करते है और ईश्वर उनका स्मरण करता है।

ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी ने कहा कि गुरू नानक देव जी ने नाम जपो, कीरत करो ते वंड के छको का संदेश दिया। सभी को प्रेमपूर्वक रहने और आपस में प्रेम करने और शान्ति का संदेश दिया। गुरूनानक देव जी की 550 वीं जंयती के अवसर पर आयोजित आज के वन्दना और श्रद्धा सुमनजंलि समारोह को पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाया गया।
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