ईद का अर्थ होता है उत्सव मनाना और मिलाद का अर्थ होता है जन्म होना। ईद-ए-मिलाद के रूप में जाना जानेवाला दिन, मिलाद-उन-नबी पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
इस्लाम में बेहद महत्वपूर्ण यह दिन इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन मनाया जाता है।
हालांकि, मोहम्मद साहब का जन्मदिन एक खुशहाल अवसर है लेकिन मिलाद-उन-नबी शोक का भी दिन है। क्योंकि रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन ही पैगंबर मोहम्मद साहब खुदा के पास वापस लौट गए थे। यह उत्सव मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं की भी याद दिलाता है।
क्या है इस दिन का महत्व

ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, मोहम्मद साहब का जन्म सन् 570 में सऊदी अरब में हुआ था। इस्लाम के ज्यादातर विद्वानों का मत है कि मोहम्मद का जन्म इस्लामी पंचांग के तीसरे महीने के 12वें दिन हुआ है। अपने जीवनकाल के दौरान, मुहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म की स्थापना की, जो अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित था। सन् 632 में पैगंबर मोहम्मद साहब की मृत्यु के बाद, कई मुसलमानों ने विविध अनौपचारिक उत्सवों के साथ उनके जीवन और उनकी शिक्षाओं का जश्न मनाना शुरू कर दिया।
मोहम्मद साहब के जन्म से जुड़े कुछ चमत्कार
आइए जानें मोहम्मद साहब के जन्म के समय हुए उन चमत्कारों के बारे में जिनके बारे में अक्सर चर्चा होती है।
- अल रहीक अल मखतुम नामक पुस्तक के अनुसार,फारस में एक 1000 साल पुरानी आग जिसकी हमेशा से पूजा होती आ रही थी, मोहम्मद साहब के जन्म के बाद वह आग बुझ गई थी।
- हानी अल-मखज़ुमी के अनुसार, सवा की झील, जिसे भी हमेशा से पूजा जाता रहा था। वह झील पैगंबर के जन्म के बाद सूख गई।
- अरब मुस्लिम इतिहासकार और हैगोग्राफर इब्न इशाक के अनुसार,मोहम्मद साहब की मां आमना ने कहा था कि गर्भावस्था के दौरान जो सामान्य दर्द अन्य महिलाओं को होता है, उन्हें उस दर्द का सामना नहीं करना पड़ा था।
- इब्न इशाक ने आगे कहा था कि मोहम्मद साहब के जन्म के दौरान,उनकी मां ने सपना देखा था कि उसने एक जबरदस्त प्रकाश को जन्म दिया, जो सीरिया में बुशरा के महलों तक फैला हुआ था।
- इब्न हज़र फ़त अल-बारी के अनुसार, जिस रात मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था, उस रात यह खबर मिली थी कि उससे निकली एक अपार ज्योति ने पूरे घर को रोशन कर दिया था।
कैसे मनाते हैं ईद मिलाद उन नबी
- ईद मिलाद उन नबी के दिन रात भर प्रार्थनाए चलती हैं।
- पैगंबर मोहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशान पर प्रार्थना की जाती है।
- मोहम्मद साहब की शान में बड़े-बड़े जुलूस निकाले जाते हैं।
- इस दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत साहब को पढ़ा जाता है और उन्हें याद किया जाता है।
- इस्लाम का सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान भी इस दिन पढ़ा जाता है।
- इसके अलावा लोग मक्का मदीना और दरगाहों पर जाते हैं।
- ऐसा कहा जाता है कि इस दिन को नियम से निभाने से लोग अल्लाह के और करीब जाते हैं।
- बच्चों को पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में तालीम दी जाती है।
- लोग आपस में खुशिया मनाते हैं और खुद को अल्लाह का करम महसूस करते हैं।
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