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Mohini Ekadashi : भगवान विष्णु के व्रत का महत्व

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Mohini Ekadashi : भगवान विष्णु के व्रत का महत्व

Mohini Ekadashi : भगवान विष्णु के व्रत का महत्व

मोहिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा हुआ है, जो विशेष रूप से पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। इस दिन का महत्व यह है कि भगवान विष्णु के मोहिनी रूप के दर्शन से भक्तों को पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। उपवास और भक्ति करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति भी होती है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

तिथि: Mohini Ekadashi 2025 में 8 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी।

Mohini Ekadashi का महत्व

मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पावन तिथि मानी जाती है। यह व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी को आता है और भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब असुर अमृत पर अधिकार करना चाह रहे थे, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत प्रदान किया। इस दिन का नाम ‘मोहिनी एकादशी’ इसलिए पड़ा क्योंकि इस दिन भगवान ने मोहिनी रूप में मोह (माया) से जगत को बचाया और धर्म की रक्षा की।

व्रत का पुण्यफल

मोहिनी एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, शांति, और मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं। यह व्रत मानसिक शुद्धि और आत्मिक जागरण कामाध्यम माना गया है। इसे करने से जीवन में सुख, समृद्धि, और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि

व्रत की पूर्व संध्या (दशमी तिथि) को सात्विक भोजन करके नियम लिया जाता है कि अगले दिन एकादशी का उपवास रखेंगे।
एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां श्री हरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
तुलसी के पत्ते, पीले फूल, धूप, दीप, और फल अर्पित करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
दिनभर व्रत रखें और भगवान विष्णु की कथा या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
रात्रि जागरण करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।

पारण विधि (व्रत खोलना)

दूसरे दिन यानी द्वादशी तिथि के दौरान सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पारण करने से पूर्व पुनः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और फिर सात्विक भोजन से उपवास खोला जाता है। कुछ लोग इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-पुण्य भी करते हैं।

विशेष संकेत

इस व्रत को पुरुष और स्त्रियाँ दोनों कर सकते हैं।
यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख, मानसिक शांति और पारिवारिक कल्याण के लिए उत्तम माना गया है।
यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाए तो यह व्रत जीवन की कई बाधाओं को दूर करने वाला सिद्ध होता है।

  • रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो
RW

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By Religion World May 3, 2025 3 min read
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