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नवाब ने हनुमान जी की पूजा क्यों की?

नवाब ने हनुमान जी की पूजा क्यों की?

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नवाब ने हनुमान जी की पूजा क्यों की?

नवाब ने हनुमान जी की पूजा क्यों की?

बहुत समय पहले की बात है। उत्तर भारत के प्रसिद्ध शहर लखनऊ में एक मुस्लिम नवाब का शासन था। वह एक न्यायप्रिय और बुद्धिमान शासक था, लेकिन उम्र के एक पड़ाव पर आकर वह एक भयानक रोग से ग्रसित हो गया।

बीमारी और बेचैनी

नवाब ने बड़े-बड़े हकीमों, वैद्यों और विदेशी चिकित्सकों से इलाज कराया, किंतु किसी की दवा काम न आई। उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती गई। पूरा राजमहल चिंता में डूबा था, और नगरवासी भी शोकाकुल थे।

संत की रहस्यमयी सलाह

एक दिन एक वृद्ध संत दरबार में आए। वे तेजस्वी और सरल स्वभाव के थे। उन्होंने नवाब की दशा देखी और बोले:

“राजन! यदि आप सच्चे मन से लखनऊ के पुराने हनुमान मंदिर में जाकर प्रार्थना करें, तो बजरंगबली की कृपा से आपकी पीड़ा दूर हो सकती है।”

नवाब चौंक पड़ा। वह मुसलमान था — क्या वह एक हिंदू देवता के सामने सिर झुका सकता है? लेकिन उसकी पीड़ा अब धर्म की सीमाओं से बड़ी हो चुकी थी।

नवाब की निःस्वार्थ प्रार्थना

रात के अंधेरे में, बिना किसी तामझाम के, नवाब सादे वस्त्रों में चुपचाप उस हनुमान मंदिर पहुँचा। वहाँ का वातावरण शांत और दिव्य था। उसने हनुमान जी की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़े, आँखों में आँसू भर आए और वह बोला:

“हे संकटमोचन! मैं धर्म नहीं, केवल विश्वास लेकर आया हूँ। यदि आप चाहें तो मेरी पीड़ा हर सकते हैं। यदि मैं ठीक हो गया, तो हर वर्ष आपके नाम पर भंडारा करवाऊँगा, और इस मंदिर की सेवा करूंगा।”

रात का चमत्कार

उस रात नवाब को गहरी नींद आई — महीनों बाद पहली बार। अगली सुबह जब वह उठा, तो उसे शरीर हल्का लगा। कुछ ही दिनों में वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।

वचन की पूर्ति

नवाब ने अपने वचन को सच्चे मन से निभाया। उसने हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, वहाँ हर ज्येष्ठ माह के मंगलवार को विशाल भंडारा, जल सेवा, और दान कार्यक्रम शुरू करवाया। उसने घोषणा की:

“यह दिन अब ‘बड़ा मंगल’ कहलाएगा — सेवा और श्रद्धा का पर्व, जिसमें हर धर्म और जाति का व्यक्ति सहभागी बन सकेगा।”

बड़ा मंगल – एक परंपरा, एक प्रेरणा

तब से लेकर आज तक, लखनऊ और आस-पास के क्षेत्रों में ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाता है। इस दिन:

  • हनुमान जी के मंदिरों में विशेष पूजा होती है।

  • सड़कों पर जगह-जगह भंडारे और प्याऊ लगाए जाते हैं।

  • लोग जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे की सेवा करते हैं।

धर्म से परे भक्ति का संदेश

यह कथा केवल एक चमत्कार की नहीं, बल्कि मानवता, विश्वास, और एकता की है।
यह सिखाती है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती, और ईश्वर हर उस दिल को सुनते हैं जो निष्कलंक होता है।

इस साल 5 बड़ा मंगल

पहला बड़ा मंगलः 13 मई 2025
दूसरा बड़ा मंगलः 20 मई 2025
तीसरा बड़ा मंगलः 27 मई 2025
चौथा बड़ा मंगलः 3 जून 2025
पांचवां बड़ा मंगलः 10 जून 2025

क्यों मनाते हैं बड़ा मंगल

मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी पहली बार ज्येष्ठ के मंगलवार को ही भगवान राम से मिले थे। इसलिए इस दिन का बजरंगबली के लिए खास महत्व है। इस कारण इस दिन हनुमानजी आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। मान्यता है कि इसीलिए भक्तों की मुराद भी आसानी से पूरी कर देते हैं और भक्त मंदिरों में भजन कीर्तन और भंडारे का कार्यक्रम करते हैं।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

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By Religion World May 13, 2025 3 min read
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