कपड़े पर लिखी गई क़ुरआन शरीफ़
अजमेर शरीफ, भारत से मदीना शरीफ, सऊदी अरब को एक पवित्र भेंट: कपड़े पर लिखी गई पवित्र क़ुरआन शरीफ़ को भारत की ओर से सऊदी अरब को आधिकारिक भेंट के रूप में देने का प्रस्ताव
अजमेर शरीफ, राजस्थान | 12 जुलाई 2025 — बेंगलुरु की दो समर्पित बहनों — सुरैया कुरैशी और बीबी तबस्सुम — ने मिलकर पवित्र क़ुरआन शरीफ़ को कपड़े पर सुंदर और सजीव तरीके से लिखा है। यह अनोखा और आध्यात्मिक रूप से विशेष तोहफ़ा हाल ही में अजमेर शरीफ की पाक दरगाह हज़रत ख्वाजा मुईनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) की दरगाह में बड़े आदर और श्रद्धा के साथ पेश किया गया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर हाजी सैयद सलमान चिश्ती, गद्दीनशीन दरगाह अजमेर शरीफ और चेयरमैन – चिश्ती फ़ाउंडेशन, के साथ सैयद जहूर बाबा, सैयद मेहराज चिश्ती, अंजुमन सदस्य सैयद असलम चिश्ती, सैयद दानिश अली चिश्ती, सैयद सरहान चिश्ती, सैयदा समर चिश्ती और समुदाय के कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
छह वर्षों की मेहनत और इबादत से लिखी गई यह पवित्र क़ुरआन शरीफ़ पाँच जिल्दों (किताबों) में है, जिसमें कुल 604 पृष्ठ हैं। यह पूरी तरह से खास कपड़े पर सुंदर हस्तलिपि में लिखी गई है। इसे जब अजमेर शरीफ दरगाह में पेश किया गया तो दर्शन करने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, और लोगों ने दुआएं मांगी और इसे बड़े अदब से देखा।
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने इस कार्य से प्रेरित होकर यह बताया की है कि आने वाले समय में यह पवित्र क़ुरआन शरीफ़ भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नई दिल्ली के माध्यम से सऊदी अरब की सरकार को आधिकारिक भेंट के रूप में देने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस पवित्र ग्रंथ को मदीना मुनव्वरा में पवित्र क़ुरआन म्यूज़ियम (Al-Maktabah al-Qur’aniyyah) में रखा जाने का सुझाव है, जो हज़रत पैग़म्बर मुहम्मद (स.अ.) की मस्जिद के पास स्थित है।
“यह पवित्र कुरआन, जो भारत की दो नेक बहनों ने बहुत प्रेम और श्रद्धा से तैयार की है, हमारी धरती की आध्यात्मिक विरासत और मक्का, मदीना शरीफ, सऊदी अरेबिया की पाक ज़मीन से हमारे ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक है। हमारी दिली ख्वाहिश है कि यह तोहफा भारत की ओर से शांति, सूफी भक्ति और भारत-सऊदी अरब के आत्मिक रिश्तों को मज़बूत करने के लिए दिया जाए,” — हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा।
आने वाले हफ्तों में प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत शुरू की जाएगी, ताकि यह भेंट एक आधिकारिक, गरिमामय और सम्मानजनक तरीके से सऊदी अरब के दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक को पेश की जा सके। यह प्रयास दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा।
यह पहल भारत की धार्मिक सहिष्णुता, आध्यात्मिक संवाद और पवित्र क़ुरआन की कलात्मक और आध्यात्मिक सेवा की समृद्ध परंपरा को भी दुनिया के सामने दर्शाती है।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो
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