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जगन्नाथ मंदिर के छप्पन भोग का रहस्य: क्या है अबधा महाप्रसाद की महिमा, जानिए इसके पीछे की अनोखी परंपरा

जगन्नाथ मंदिर के छप्पन भोग का रहस्य: क्या है अबधा महाप्रसाद की महिमा, जानिए इसके पीछे की अनोखी परंपरा

जगन्नाथ मंदिर के छप्पन भोग का रहस्य: क्या है अबधा महाप्रसाद की महिमा, जानिए इसके पीछे की अनोखी परंपरा
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जगन्नाथ मंदिर के छप्पन भोग का रहस्य: क्या है अबधा महाप्रसाद की महिमा, जानिए इसके पीछे की अनोखी परंपरा

ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर को सनातन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर केवल अपनी भव्य रथ यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मिलने वाले महाप्रसाद और छप्पन भोग के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। लाखों श्रद्धालु हर वर्ष भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ इस दिव्य प्रसाद का लाभ लेने पहुंचते हैं। मंदिर के महाप्रसाद से जुड़े कई ऐसे रहस्य और परंपराएं हैं, जो सदियों से लोगों को आकर्षित करती रही हैं।

क्या है छप्पन भोग?

छप्पन भोग का अर्थ है भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित करना। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को प्रतिदिन आठ बार भोजन कराया जाता था। जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी उंगली पर उठाकर रखा, तब वे भोजन नहीं कर सके। आठ भोजन प्रतिदिन और सात दिनों के हिसाब से कुल 56 भोजन हुए। इसी स्मृति में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई, जिसे छप्पन भोग कहा जाता है।

क्या है अबधा महाप्रसाद?

पुरी जगन्नाथ मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को “महाप्रसाद” या “अबधा” कहा जाता है। यह प्रसाद पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को अर्पित किया जाता है, फिर मां विमला को समर्पित करने के बाद महाप्रसाद का स्वरूप प्राप्त करता है। इसके बाद ही इसे श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि यह केवल भोजन नहीं बल्कि भगवान की कृपा का प्रतीक है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में से एक

जगन्नाथ मंदिर की रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जाता है। भोजन बनाने के लिए आज भी मिट्टी के बर्तनों और लकड़ी की आग का उपयोग किया जाता है। विशेष बात यह है कि भोजन बनाने की प्रक्रिया सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार ही संपन्न होती है।

महाप्रसाद से जुड़ा अनोखा रहस्य

जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद को लेकर एक प्रसिद्ध मान्यता है कि यहां पकाया गया भोजन कभी कम नहीं पड़ता और न ही व्यर्थ जाता है। श्रद्धालुओं की संख्या चाहे जितनी हो, प्रसाद सभी को उपलब्ध हो जाता है। इसे भगवान जगन्नाथ की दिव्य कृपा माना जाता है।

एक अन्य रोचक मान्यता यह भी है कि जब मिट्टी के बर्तनों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर पकाया जाता है, तो सबसे ऊपर रखा बर्तन पहले पक जाता है। यह परंपरा वर्षों से लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बनी हुई है।

महाप्रसाद में क्या-क्या होता है?

महाप्रसाद में चावल, दाल, खिचड़ी, सब्जियां, खाजा, रसाबली, विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। कई स्रोतों के अनुसार मंदिर में 56 से भी अधिक प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाते हैं।

आनंद बाजार की परंपरा

महाप्रसाद का वितरण मंदिर परिसर के प्रसिद्ध “आनंद बाजार” में किया जाता है। यहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह परंपरा समानता और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।

क्यों माना जाता है इतना पवित्र?

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार जगन्नाथ महाप्रसाद को “अन्न ब्रह्म” कहा जाता है। श्रद्धालु इसे केवल भोजन नहीं बल्कि भगवान का आशीर्वाद मानते हैं। ओडिशा की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इसका विशेष स्थान है और कई शुभ अवसरों पर महाप्रसाद को प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है।

निष्कर्ष

पुरी जगन्नाथ मंदिर का छप्पन भोग और अबधा महाप्रसाद केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, समानता और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। दुनिया की विशालतम मंदिर रसोइयों में से एक में तैयार होने वाला यह महाप्रसाद आज भी लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। यही कारण है कि जगन्नाथ धाम का महाप्रसाद सदियों से श्रद्धा और रहस्य का केंद्र बना हुआ है।

RW

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By Religion World June 11, 2026 4 min read
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