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Chaitra Navratri 2025: आस्था और शक्ति का केंद्र अंबाजी मंदिर

Chaitra Navratri 2025: आस्था और शक्ति का केंद्र अंबाजी मंदिर

Chaitra Navratri 2025: आस्था और शक्ति का केंद्र अंबाजी मंदिर
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Chaitra Navratri 2025: आस्था और शक्ति का केंद्र अंबाजी मंदिर

Chaitra Navratri 2025: आस्था और शक्ति का केंद्र अंबाजी मंदिर

अंबाजी मंदिर गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर मां अंबा (या अंबाजी) को समर्पित है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसका धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंबाजी मंदिर का इतिहास

अंबाजी मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। मान्यता है कि यहां पर देवी सती का हृदय गिरा था, इसलिए यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यह मंदिर बिना किसी मूर्ति के है। यहां मां अंबाजी की पूजा श्रीयंत्र (Sri Yantra) के रूप में की जाती है। इस श्रीयंत्र को खुली आंखों से देखना वर्जित है।

माना जाता है कि यह मंदिर त्रेता युग में भगवान राम के समय का है। कहा जाता है कि भगवान राम ने भी रावण से युद्ध से पहले यहां देवी अंबा की पूजा की थी।

अंबाजी मंदिर की वास्तुकला

अंबाजी मंदिर की वास्तुकला बेहद सुंदर और भव्य है। मंदिर संगमरमर से बना है और इसकी दीवारों पर बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है। मंदिर के शिखर पर सोने का कलश और ध्वज लहराता है। मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण और भक्तिमय होता है।

मंदिर से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं

  1. शक्तिपीठ का महत्व:
    अंबाजी मंदिर को 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंगों को अलग किया। कहा जाता है कि मां सती का हृदय इसी स्थान पर गिरा था।

  2. श्रीयंत्र की पूजा:
    अंबाजी मंदिर में देवी अंबा की कोई मूर्ति नहीं है। यहां देवी की पूजा श्रीयंत्र के माध्यम से की जाती है, जिसे विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।

अंबाजी मंदिर में उत्सव और मेले

  1. भाद्रपद पूर्णिमा मेला:
    अंबाजी मंदिर में हर साल भाद्रपद पूर्णिमा पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं और मां अंबा के दर्शन करते हैं।

  2. नवरात्रि उत्सव:
    नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस समय मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की भव्य पूजा की जाती है और गरबा और डांडिया का आयोजन भी किया जाता है।

कैसे पहुंचे अंबाजी मंदिर?

  • निकटतम हवाई अड्डा: अहमदाबाद एयरपोर्ट, जो मंदिर से करीब 180 किलोमीटर दूर है।

  • रेलवे स्टेशन: अंबाजी के निकट पालनपुर रेलवे स्टेशन है, जो 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

  • सड़क मार्ग: अंबाजी मंदिर अच्छी सड़क कनेक्टिविटी से जुड़ा है। बसें और टैक्सी अहमदाबाद, पालनपुर, माउंट आबू आदि से उपलब्ध हैं।

मंदिर में दर्शनों का समय

  • सुबह: 7:00 बजे से दोपहर 11:30 बजे तक

  • दोपहर: 12:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक

  • शाम: 6:30 बजे से रात 9:00 बजे तक

मंदिर में प्रमुख धार्मिक क्रियाएं और सेवाएं

मंदिर में नियमित रूप से आरती, हवन, और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। श्रद्धालु यहां माता रानी को चुनरी, नारियल, प्रसाद और फूल चढ़ाते हैं। भक्त मंदिर के शांति भरे वातावरण में ध्यान और साधना भी कर सकते हैं।

मंदिर में मोबाइल फोन, कैमरा, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना प्रतिबंधित है। मंदिर में पवित्रता बनाए रखने के लिए विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

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By Religion World March 27, 2025 3 min read
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