अलविदा जुमा की अहमियत : ईद की तैयारियां शुरु
जैसा कि हम सब जानते हैं कि रमजान के महीने में आखिरी जुमा यानि शुक्रवार को ही अलविदा जुमा कहा जाता है। इस अलविदा जुमे के बाद लोग ईद की तैयारियों में लग जाते है। जुमा अलविदा रमजान माह के तीसरे अशरे मतलब आखिरी दस दिन में पड़ता है. तीसरा अशरा निजात का अशरा होता है. इस जुमे को साल भर पड़ने वाले जुमे से अव्वल (बेहतरीन) माना जाता है। इस साल अलविदा जुमा देश में आज है।
क्यों है अलविदा जुमा इतना विशेष
अलविदा जुमे की नमाज का विशेष महत्व है. यह अफजल जुमा होता है. इससे जहन्नम से निजात मिलती है. यह आखिरी अशरा है, जिसमें एक ऐसी रात होती है, जिसे तलाशने पर हजारों महीने की इबादत का लाभ एक साथ मिलता है.
जरूर कुबूल होती है दुआ
यूं तो जुमे की नमाज तो पूरे साल ही खास होती है पर रमजान का आखिरी जुमा अलविदा सबसे खास होता है. अलविदा की नमाज में साफ दिल से जो भी दुआ की जाती है, वह जरूर पूरी होती है. जमात-उल-विदा इबादत का दिन है. इस दिन की इबादत की बहुत अहमियत है. कुछ लोग तो अलविदा का पूरा दिन कुरान पढऩे में ही बिता देते हैं.
अलविदा जुमा के बाद होती है ईद की तैयारी
अलविदा जुमा रमजान महीने के आखिर में पड़ा है इसके बाद ही लोग ईद की तैयारी में लग जाते है. अलविदा जुमें के बाद से बाजार में देर रात तक लोग सामान खरीदारी करते है।
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