RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

कृष्ण जन्माष्टमी : भगवान कृष्ण की सबसे अनूठी लीलाएं

कृष्ण जन्माष्टमी : भगवान कृष्ण की सबसे अनूठी लीलाएं

कृष्ण जन्माष्टमी : भगवान कृष्ण की सबसे अनूठी लीलाएं
Visual Archive

कृष्ण जन्माष्टमी : भगवान कृष्ण की सबसे अनूठी लीलाएं

कृष्ण जन्माष्टमी : भगवान कृष्ण की सबसे अनूठी लीलाएं

भगवान कृष्ण का पूरा जीवन ही लीला है, पर हमने उनकी 8 अनूठी लीलाएं चुनने का फैसला किया। आइये जानते हैं इन लीलाओं की मिठास
साभार : https://isha.sadhguru.org/
 

भगवान श्री कृष्ण का अवतरण

वासुदेव और देवकी की आठवीं संतान आने से पहले कंस बहुत घबरा गया। वासुदेव और देवकी को नजऱबंद करके रखा गया था, लेकिन बाद में वासुदेव को जंजीरों में बांध दिया गया और देवकी को एक कारागार में डाल दिया गया। भाद्र कृष्ण अष्टमी को आधी रात को देवकी के यहां आठवीं संतान ने जन्म लिया। उस वक्त बादल गरज रहे थे और तेज बारिश हो रही थी। कुछ होने के डर से कंस ने किसी को भी कारागार में जाने की अनुमति नहीं दी थी। उसने पूतना नाम की अपनी एक भरोसेमंद राक्षसी को दाई के तौर पर देवकी पर नजर रखने को कहा था। योजना कुछ इस तरह थी कि जैसे ही बच्चे का जन्म होगा, पूतना उसे कंस को सौंप देगी और उसे मार दिया जाएगा। प्रसव पीड़ा शुरू हुई। दर्द होता और कम हो जाता, फिर होता और फिर कम हो जाता।

वसुदेव अंतर्ज्ञान से विष्णु अवतरण को जान गए
वसुदेव अंतर्ज्ञान से विष्णु अवतरण को जान गए
शीघ्र ही वासुदेव ने अंतर्ज्ञान से दैवीय शक्ति को पहचान लिया, और बच्चे को लेकर यमुना नदी की ओर चल दिए।

कृष्ण की शिशु लीला

जब कृष्ण तीन माह के थे, तब उनके गांव में पूर्णिमा पर्व मनाया जा रहा था, जो कि ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा होता था। वैसे तो हर दिन एक त्योहार होता था, लेकिन पूर्णिमा का दिन इसका अच्छा बहाना था। दोपहर में सभी परिवार नदी किनारे एकत्रित होते थे। वहीं भोजन पकाते और सायंकाल नृत्य करते थे। सभी महिलाएं भोजन बनाने में व्यस्त थीं और बालक इधर उधर खेल रहे थे।

बाल कृष्ण
बाल कृष्ण
यह उनके दैवीय शक्ति का पहला प्रदर्शन था, जिसे वह आवश्यकता पडऩे पर ही इस्तेमाल में लाते थे, नहीं तो वह एक साधारण मनुष्य की भांति ही जीवन के संघर्ष से गुजरते थे।

कृष्ण – एक मनमोहक और प्यारा चोर

अगर आप कृष्ण की बालभूमि गोकुल नगरी के बारे में जानना चाहते हैं तो आपको अपने अंदर एक ख़ास स्थिति बनानी होगी। अद्भुत था कृष्ण का बाल्य जीवन – उनका मनमोहक चेहरा, अनुपम मुस्कान, बांसुरी और उनका नृत्य ऐसा था जिससे लोग आनंद में डूब जाते थे। यह एक ऐसा आनंद था, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं जाना था।

कृष्ण अपने साथी के साथ
कृष्ण अपने साथी के साथ

जब राधा और कृष्ण ने पहली बार देखा एक दुसरे को

जब कृष्ण ने गोपियों के कपड़े चुराए तो यशोदा माँ ने उन्हें बहुत मारा और फिर ओखली से बांध दिया। कृष्ण भी कम न थे। मौका मिलते ही उन्होंने ओखली को खींचा और उखाड़ लिया और फौरन जंगल की ओर निकल पड़े, क्योंकि वहीं तो उनकी गायें और सभी सथी संगी थे।
अचानक जंगल में उन्हें दो महिलाओं की आवाजें सुनाईं दीं। कृष्ण ने देखा वे दो बालिकाएं थीं, जिनमें से छोटी वाली तो उनकी सखी ललिता थी और दूसरी जो उससे थोड़ी बड़ी थी, उसे वह नहीं जानते थे, लेकिन लगभग 12 साल की इस लड़की की ओर वह स्वयं ही खिंचते चले गए।

2014-07----221-19.01.2611

कृष्ण और राधे की पहली रास लीला

गोकुल और बरसाना के ग्वाले, वृंदावन नाम की एक जगह पर जाकर बस गए थे। वृंदावन काफी खुली और हरी-भरी जगह थी। ये नई बस्ती कई मायनों में पुरानी मान्यताओ को तोड़ने वाली और ज्यादा खुशहाल साबित हुई। चूंकि ये लोग अपने पुराने परंपरागत घरों को छोड़कर आए थे इसलिए इनके पास पहले से अधिक आजादी थी। यह नई जगह ज्यादा समृद्ध और खूबसूरत थी। खासतौर पर युवाओं और बच्चों को यहां इतनी आजादी मिली, जिसे उन्होंने पहले महसूस नहीं किया था।

पहली रास लीला
पहली रास लीला
यहां चीजें वाकई काफी अलग थीं। इन बच्चों के समूह में राधे थोड़ी बड़ी थीं।

कृष्ण के प्रेम-विरह में राधे

जब कृष्ण के प्रति राधा का प्रेम समाज को चुभने लगा तो घर से उनके निकलने पर रोक लगा दी गई। लेकिन कृष्ण की बंसी की धुन सुनकर राधा खुद को रोक नहीं पाती थी। एक दिन पूर्णिमा की शाम थी। कृष्ण विरह में राधेराधे को बांसुरी की मधुर आवाज सुनाई दी।

कृष्ण विरह में राधे

कृष्ण ने उतारा महान पहलवान चाणूर को मौत के घाट

कंस ने अपने बहुत पुराने सलाहकार को बुलाया और कहा कि कैसे भी कृष्ण को चाणूर के साथ कुश्ती के लिए अखाड़े में बुलाओ। चाणूर और मुष्टिक, दो बड़े पहलवान थे जो कई सालों से किसी से भी नहीं हारे थे। उन्हें बताया गया कि उन्हें कृष्ण और बलराम को अखाड़े में आने का लालच देकर मार देना है। कंस के सलाहकार और मंत्री ने कहा कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं ? चाणूर महान पहलवान है और वह एक सोलह साल के बालक के साथ नहीं लड़ सकता क्योंकि यह धर्म और खेल के नियम दोनों के खिलाफ है।

8428518235_81bd0864e3_---2
कंस ने कहा – भाड़ में जाएं नियम।

कृष्ण को हुआ अपने असली स्वरूप का बोध

गर्गाचार्य ने कृष्ण को नारद द्वारा उनके बारे में की गई भविष्यवाणी के बारे में बताया। पहली बार उन्होंने कृष्ण के साथ यह राज साझा किया कि वह नंद और यशोदा के पुत्र नहीं हैं।

कृष्ण बचपन से नंद और यशोदा के साथ रह रहे थे। अचानक उन्हें बताया गया कि वह उनके पुत्र नहीं हैं। यह सुनते ही वह वहीं उठ खड़े हुए और अपने अंदर एक बहुत बड़े रूपांतरण से होकर गुजरे। अचानक कृष्ण को महसूस हुआ कि हमेशा से कुछ ऐसा था, जो उन्हें अंदर ही अंदर झकझोरता था। लेकिन वह इन उत्तेजक भावों को दिमाग से निकाल देते थे और जीवन के साथ आगे बढ़ जाते थे। जैसे ही गर्गाचार्य ने यह राज कृष्ण को बताया, उनके भीतर न जाने कैस-कैसे भाव आने लगे! उन्होंने गुरु से विनती की, ‘कृपया, मुझे कुछ और बताइए।’ एक ग्वाला तारणहार में रूपांतरित हो गया

एक ग्वाला तारणहार में रूपांतरित हो गया

कृष्ण को पता था कि अब उन्हें वहां से विदा लेना है। जाने से पहले उन्होंने एक रास का आयोजन किया। जाने से पहले वह अपने उन लोगों के साथ एक बार और नृत्य कर लेना चाहते थे। उन्होंने जमकर गाया, नृत्य किया।

कृष्ण विदा लेते हुए
कृष्ण विदा लेते हुए
साभार : https://isha.sadhguru.org/
RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World August 31, 2018 6 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

दही-हांडी की शुरुआत कब और कहां हुई थी? 

दही-हांडी की शुरुआत कब और कहां हुई थी? दही-हांडी, जन्माष्टमी का सबसे रोमांचक और ऊर्जावान पर्व, जिसे देख कर हर किसी के मन में बस एक ही तस्वीर…

Read now
Hinduism

कृष्ण जन्माष्टमी कब है – 15 अगस्त या 16 अगस्त?

कृष्ण जन्माष्टमी कब है – 15 अगस्त या 16 अगस्त? श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया…

Read now
Hinduism

द्वारका नगरी: श्रीकृष्ण की अमर कथा

द्वारका नगरी: श्रीकृष्ण की अमर कथा द्वारकाधीश मंदिर, गुजरात भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है। यह भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और गुजरात…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *