आर्ट ऑफ़ लिविंग ने बदली 68 उग्रवादियों की जिंदगी
हमारा देश आजादी के 71वें साल में प्रवेश कर चुका है लेकिन सही मायने में भारत तब आज़ाद माना जायेगा जब देश में फ़ैल रहे आतंकवाद और हिंसा में कमी आए। इसी तरह की कुछ पहल करने का प्रयास किया है आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर और उनके सहयोगी स्वामी भव्य तेज और दीपा दवे ने।
15 अगस्त की पूर्व संध्या पर मणिपुर में अपनी स्वेच्छा से 68 मिलिटैंट्स ने आत्मसमर्पण किया। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सभी मिलिटेंटस द्वारा किये गए आत्मसमर्पण स्वीकार किया और काफी लम्बे समय उपरांत घर वापसी पर उनका स्वागत किया।
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इस सन्दर्भ में रिलीजन वर्ल्ड ने आर्ट ऑफ़ लिविंग में स्वामी भव्यतेज से बात की। “उन्होंने बताया कि इन मिलिटैंट्स को वापस लाने में थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ी लेकिन हम सफल हुए। उन्होंने बताया कि मणिपुर के यह मिलिटैंट्स स्वयं ही आत्मसर्पण करना चाहते थे और इन्होने हमसे संपर्क साधा. उन्होंने आर्ट ऑफ़ लिविंग की टीचर दीपा दवे जी से संपर्क साधा था. दीपा इस पर काफी लम्बे समय से कार्य कर रही हैं. जिन्होंने इसकी जानकारी श्री श्री रविशंकर को दी और श्री श्री ने यह कार्य मुझे सौंपा. राज्य सरकार, केंद्र सरकार और मिलिटैंट्स से बात करते हुए और प्रक्रिया पूरी करने में 6 माह लगे. और देखिये आज हम इनके वापस आने से उत्साहित हैं”।

रिलीजन वर्ल्ड ने जब स्वामी भव्यतेज से पूछा कि इन मिलिटैंट्स को सामाजिक अस्तित्व प्रदान करने में आर्ट ऑफ़ लिविंग क्या भूमिका निभाएगा. तो उन्होंने कहा, “इस समय सरकार भी उन्हें पूरा सहयोग दे रही है और हम भी इन्हें पूरा सहयोग देंगे लेकिन अभी इसमें थोडा समय लगेगा यह सरकार की प्रक्रिया है जो लम्बी चलती है लेकिन फिर भी हम अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ेंगे”
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जब उनसे पुछा गया की स्वतंत्रता दिवस और स्वतंत्र भारत से आप इस घटना से किस तरह जोड़कर देखते हैं. इस विषय पर उन्होंने कहा कि “आज ज़रूरत हैं इन भटके हुए मिलिटैंट्स को मेन स्ट्रीम में वापस लाने की और यही जब आकर इस देश की तरक्की में अपना हाथ बढ़ाएंगे तभी स्वतंत्रता के सही मायने नज़र आएंगे. ख़ास तौर पर नार्थ ईस्ट के क्षेत्रों में क्यूंकि जब तक वहां शांति नहीं है तो स्वतंत्रता सही मायनों में नहीं है. क्योंकि जब तक दिमाग और वातावरण में शांति नहीं रहेगी तब तक आजादी का कोई अर्थ नहीं है”

68 मिलिटेंट में महिला मिलिटेंट भी शामिल है। उनमें से एक महिला मिलिटेंट ने कहा कि जब हमको लगा कि आत्मसर्पण की नीति लागू हो चुकी है तो हमें अपने घर वापस आने की एक राह नज़र आई और इस वापसी में आर्ट ऑफ़ लिविंग ने हमारी मदद की। यह मिलिटैंट्स कई बड़े गुटों से थे जैसे MTF, KCP, KKYL, PLA. सही मायने में आजादी का अर्थ भटके हों को सही राह दिखाना है.
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