अयोध्या, 20 अगस्त; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया, जिसके उपरांत अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है. इसका निर्माण कार्य सीबीआरआई रुड़की और आईआईटी मद्रास ने शुरू किया है.
मंदिर निर्माण में लगेंगे लगभग 40 महीने
मंदिर निर्माण करने वाली कंपनी ने मिट्टी का परीक्षण किया है. अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण 36 से 40 महीने में पूरा होगा और इसका प्राचीन पद्धति से निर्माण किया जाएगा. इसमें कोई लोहे का प्रयोग नहीं होगा, मंदिर किसी भी आपदा में सुरक्षित रहने वाला बनेगा.
राम मंदिर निर्माण को लेकर अहम बैठक
दिल्ली में राम मंदिर निर्माण को लेकर अहम बैठक हुई. राम मंदिर भवन निर्माण समीति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में आज मंदिर निर्माण को लेकर बैठक हुई. बैठक में आरएसएस के सरकार्यवाह भैया जी जोशी, आईआईटी मद्रास, सीबीआराई रुड़की और मंदिर निर्माण करने वाले कंपनी समेत 10 प्रतिनिधि मौजूद थे. बैठक में फैसला हुआ है कि मंदिर निर्माण पूरा होने तक प्रोग्रेस रिपोर्ट के लिए रोज़ मीटिंग होगी. बैठक में निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए चर्चा हुई. बैठक में इसमें तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अलावा वास्तु शास्त्री भी मौजूद रहे
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने दी जानकारी
श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है। CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के अभियंता भूमि की मृदा के परीक्षण के कार्य में लगे हुए है। मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) August 20, 2020
अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरु हो गया है. इसकी जानकारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने ट्वीटट करके दी है. ट्रस्ट ने बताया है, कि मंदिर निर्माण में 36 से 40 महीने का वक़्त लगेगा. ट्रस्ट ने कहा है, श्रीराम मंदिर निर्माण भारत की प्राचीन पद्धति से किया जा रहा है, ताकि हज़ारों साल में भी मंदिर को भूकंप आपदा से नुकसान ना हो.
https://twitter.com/ShriRamTeerth/status/1296346214623936515
साथ ही ट्रस्ट ने ट्वीट में ये लिखा कि “मन्दिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा. निर्माण कार्य हेतु 18 इंच लम्बी, 3 mm गहरी और 30 mm चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता पड़ेगी. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र श्रीरामभक्तों का आह्वान करता है कि तांबे की पत्तियां दान करें.”
मिट्टी के नमूने जांच के लिए भेजे गए
दो स्थानों से 60 मीटर तथा पांच स्थानों से 40 मीटर की गहराई से मिट्टी के नमूने भेजे गए हैं . कुछ जगहों पर 20 मीटर की गहराई से मिट्टी के नमूने भेजे गए हैं .
ट्रस्ट के महासचिव ने बताया कि केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) तथा आईआईटी मद्रास के प्रोफेसरों ने मिलकर भूकंप संबंधी विषयों एवं प्रभावों को मापा है. करीब 3 एकड़ जमीन पर मंदिर का निर्माण होगा और लगभग 1200 खम्भे होंगे.
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