21 और 22 अक्टूबर 2017 को मनाई जाएगी युगावतार बहाउल्लाह के जन्म की 200वी वर्षगांठ
जयपुर, 21 अक्टूबर; बहाई धर्म के संस्थापक युगावतार ‘बहाउल्लाह’ का जन्मदिवस समारोह 21 अक्टूबर को स्थानीय आध्यात्मिक सभा जयपुर द्वारा प्रताप नगर स्थित जानकी देवी स्कूल मे बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जायेगा. इस अवसर पर सामुहिक प्रार्थनाये , अथितियों द्वारा उद्बोधन व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा . इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश वर्मा , संसदीय सचिव, विधायक बगरू विधानसभा क्षेत्र विशिष्ट अथिति प्रताप सिंह खाचरियावास जिलाध्यक्ष कांग्रेस जयपुर शहर व अध्यक्षता सरदार जसबीर सिंह अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग राजस्थान होगें.

जहाँ भारत में लगभग 20 लाख लोग इस समारोह मे शामिल होगें वही जयपुर में हजारों की संख्या में इस आयोजन के भागीदार होंगे.
गौरतलब है की बहाउल्लाह का जन्म सन 1817 को ईरान की राजधानी तेहरान में हुआ था जिनके आगमन का उद्देश्य है समस्त मानवजाति की एकता व विश्व शांति. युगावतार बहाउल्लाह के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित, विश्व-भर में लाखों लोग, 21 और 22 अक्टूबर 2017 को ‘उनके’ जन्म की 200वी वर्षगाँठ को मनायेंगे. बहाउल्लाह बहाई धर्म के संस्थापक है. बहाई धर्म का आरम्भ ईश्वर द्वारा दो दिव्य संदेशवाहकों को दिये गये मिशन के साथ हुआ. ये संदेशवाहक थे बाब और बहाउल्लाह.

बहाई धर्म की विशिष्ट एकता जो उन्होंने स्थापित की वह आज बहाउल्लाह द्वारा दिये गये स्पष्ट आदेशों से फूटी शाखा है, जिसने ‘उनके’ स्वर्गारोहण के बाद भी मार्गनिर्देश की निरन्तरता का आश्वासन दिया है. संविदा के नाम से जाना जाने वाला यह उत्तराधिकार बहाउल्लाह से ‘उनके’ पुत्र अब्दुल-बहा और बाद में ‘उनके’ नाती शोगी एफेंदी और विश्व न्याय मंदिर को मिला, जैसा आदेश बहाउल्लाह द्वारा दिया गया था. एक बहाई बाब, बहाउल्लाह तथा नियुक्त उत्तराधिकारियों की दिव्य सत्ता को स्वीकार करता है.
21 अक्टूबर को बहाउल्लाह के जन्मदिवस के लिए पूरी दुनिया के बहाई(बहाउल्लाह के अनुयायी) लगभग पिछले एक साल से पुरे जोर-शोर से तैयारियां कर रहे है. इस जन्मोत्सव के लिए दुनिया भर के बहाई मित्र लोगों को बहाउल्लाह का सन्देश दे रहे है और अपने-अपने देश की सरकारों को भी इस जन्मोत्सव के बारे में बता रहे है. इस दिन महोत्सव के लिए कई देशों की सरकारों ने अपनी शुभकामनायें भी बहाइयों को प्रेषित की है.बहाउल्लाह का जन्म 1817 में तेहरान में हुआ था .
दो शताब्दी बाद, सारे विश्व में ‘उनका’ जन्मोत्सव मनाया जा रहा है; साथ ही ‘उनके’ प्रकटीकरण के अग्रदूत बाब का जन्मोत्सव भी मनाया जा रहा है, जिनका जन्म 1819 में, फ़ारस में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कैलेंडर के अनुसार बहाउल्लाह के जन्म से एक दिन पहले हुआ था. ये ‘युगल पावन जन्मदिवस’ बहाईयों और उनके मित्रों द्वारा एक ही वार्षिक त्योहार के रूप में मनाये जाते हैं, जहाँ इन दोनों ‘दैवीय प्रकाशग्रहों’ का, एक साथ स्मरण किया जाता है, जिनके जीवन व ध्येय निकटता से गुथें हुए हैं.
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