बसंत पूर्णिमा मुहूर्त, पूजा विधि, इतिहास और कथा
वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार हिन्दू धर्म में वर्ष के प्रत्येक माह में जिस दिन पूरा चाँद होता है. उसे पूर्णिमा माना जाता है. अतः वर्ष के प्रत्येक महीने में पूर्णिमा व्रत मनाया जाता है. वर्ष 2018 में फाल्गुन माह की पूर्णिमा 1 मार्च 2018 को मनाया जायेगा. फाल्गुन पूर्णिमा को हिन्दू धर्म के लोग होली त्यौहार को मनाते है. इसे बसंत पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योकि बसंत ऋतू में यह पूर्णिमा पर्व पड़ता है.
वसंत पूर्णिमा पूजा मुहूर्त
1 मार्च 2018 को सुबह 8:57 से वसंत पूर्णिमा आरम्भ और 2 मार्च 2018 को सुबह 6:21 पर समाप्त
बसंत पूर्णिमा पूजन विधि
फाल्गुन या बसंत पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस दिन उपासक को भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, पान, सुपारी, दूर्वा एवम प्रसाद भगवान को प्रिय चूरमा का भोग लगाये. पूजन समाप्ति के पश्चात भगवान विष्णु से परिवार के लिए सुख, शांति और मंगल की कामना करे. भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से सदैव मंगल होता है. चंद्रोदय के उपरांत चन्द्रमा की अर्घ देकर अपने व्रत का समापन करें.

पूजा के दौरान इस मन्त्र का जाप करें-
वसंत पूर्णिमा के पूजन के उपरान्त आप इन मन्त्रों का जाप करें-
ॐ ह्रींग क्लींग महालाक्ष्मय नमः .
ॐ श्रींगश्रिये नमः
इन दोनों में से किसी भी मन्त्र को १०८ मनके की माला में २१ बार जाप करें. इस मन्त्र से आपके घर में सुख समृद्धि व्याप्त होगी.
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वसंत पूर्णिमा की कथा
महाकाव्य कुमार सम्भवम् में कालिदास ने इस पूर्णिमा के बारे में बताया है. भगवान शिव जी की पत्नी माता सती ने पिता के द्वारा अपमानित होने के कारण खुद को यज्ञ की हवन कुण्ड में प्राण त्याग दिया था. इस बात से भगवन शिव जी अति क्रोधित हो गए थे. इस क्रोध में वो सती के शव को अपने कंधे पर ले विक्षिप्त की तरह यहाँ-वहाँ भटकने लगे. उस समय भगवान विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित कर दिया था. यह देखकर समस्त देव गण तथा भगवान विष्णु एवम ब्रह्मा जी ने उन्हें मनाया. परन्तु शिव जी ने कठोर संकल्प लिया की भविष्य में कभी विवाह नही करेंगे. एक बार माता पार्वती कैलाश पर्वत पर भगवान शिव जी के दर्शन के लिए गयी थी. उसी समय जब भगवान शिव जी ध्यान में लीन थे कामदेव ने उन्हें उकसाने की कोशिश की जिससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और क्रोध में भगवान शिव जी ने अपनी तीसरी आँख खोलकर कामदेव को जला दिया. जब कामदेव की पत्नी रति को पता चला तो रति भगवान शिव से क्षमा याचना करने लगी. उस समय भगवान शिव ने कहा भविष्य में जब हमारा विवाह माता पार्वती से होगी. उस बसंत पूर्णिमा के दिन तुम्हारा पति जीवित हो जायेगा.
बसंत पूर्णिमा का महत्व
बसंत पूर्णिमा के दिन होली भी मनाई जाती है. अतः यह दिन अति पावन है. बसंत ऋतु में प्रकृति में नया रंग उमड़ आता है. चारो तरफ हरियाली उभर आती है. पेड़-पौधे एवम वातावरण में नव संचार होता है. अतः वसंत पूर्णिमा का अति विशेष महत्व है.
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