बसोड़ा पूजा 2025: पूरी जानकारी
बसोड़ा व्रत 2025 में होली के आठवें दिन मनाया जाएगा। यह व्रत होली के बाद आने वाले पहले अष्टमी तिथि को किया जाता है।
बसोड़ा का महत्व:
बसोड़ा व्रत मुख्य रूप से शीतला माता की पूजा के लिए किया जाता है। इस दिन माता शीतला की आराधना कर परिवार के स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। “बसोड़ा” का अर्थ है ठंडा भोजन, इसलिए इस दिन ठंडा भोजन (पिछली रात का पका हुआ भोजन) खाया जाता है।
शीतला माता को चेचक (गर्मी के रोग), खसरा और त्वचा संबंधी बीमारियों से बचाने वाली देवी माना जाता है। इस दिन महिलाएँ अपने बच्चों की रक्षा के लिए व्रत रखती हैं और शीतला माता का पूजन करती हैं।
बसोड़ा पूजा विधि:
- संध्या के समय भोजन पकाना बंद कर दिया जाता है। अगले दिन ठंडे भोजन (बसोड़े का प्रसाद) से शीतला माता की पूजा की जाती है।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करके शीतला माता की मूर्ति या चित्र की सफाई करें।
- शीतला माता को ठंडा भोजन (रोटी, चावल, दही, पूआ आदि) का भोग लगाएं।
- पूजा में गंध, हल्दी, अक्षत, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
- चेचक, खसरा और अन्य बीमारियों से बचाव के लिए शीतला माता की आरती करें और प्रार्थना करें।
बसोड़ा से जुड़ी पौराणिक कथा:
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार एक गांव की महिलाएं शीतला माता की पूजा का दिन भूल गईं। इस कारण माता शीतला ने गांव में महामारी फैला दी। इसके बाद महिलाएं माता की शरण में गईं और सच्चे मन से क्षमा माँगी। माता ने उन पर कृपा कर गांव को महामारी से मुक्त कर दिया। तभी से बसोड़ा का व्रत माता शीतला की कृपा पाने और रोगों से बचने के लिए किया जाने लगा।
बसोड़ा व्रत का प्रसाद:
इस दिन पूजन के बाद प्रसाद के रूप में ठंडा भोजन (जैसे बासी रोटी, पूआ, दही, चावल) ग्रहण किया जाता है। यह ठंडे भोजन को शीतला माता का प्रसाद माना जाता है, जो रोगों से बचाने वाला होता है।
बसोड़ा का व्रत हमें स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व सिखाता है। शीतला माता की कृपा से परिवार में रोगों से मुक्ति और सुख-शांति बनी रहती है। यह व्रत हिंदू धर्म में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के उद्देश्य से किया जाता है।
जय शीतला माता!
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो
Editorial Review Note
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