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भोलेनाथ को नहीं भाते ये 3 फूल – जानिए क्यों (शास्त्र प्रमाण सहित)

भोलेनाथ को नहीं भाते ये 3 फूल – जानिए क्यों (शास्त्र प्रमाण सहित)

भोलेनाथ को नहीं भाते ये 3 फूल – जानिए क्यों (शास्त्र प्रमाण सहित)
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भोलेनाथ को नहीं भाते ये 3 फूल – जानिए क्यों (शास्त्र प्रमाण सहित)

भोलेनाथ को नहीं भाते ये 3 फूल – जानिए क्यों(शास्त्र प्रमाण सहित)

सावन मास में भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस पावन महीने में शिव भक्त जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और रुद्राभिषेक द्वारा भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। परंतु पूजा के दौरान अगर कुछ गलत सामग्री चढ़ा दी जाए, तो साधना निष्फल भी हो सकती है।

शिवपुराण और अन्य ग्रंथों में कुछ फूलों के प्रयोग को वर्जित बताया गया है। आइए जानते हैं ऐसे ही तीन फूलों के बारे में जो शिवलिंग पर चढ़ाना मना है – शास्त्रों के प्रमाण सहित।

1. केतकी का फूल – शिवपुराण से निषेध

केतकी (केवड़ा) का फूल शिवलिंग पर चढ़ाना शिवपुराण में स्पष्ट रूप से वर्जित बताया गया है। एक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। शिवजी ने उन्हें परखने के लिए एक अग्निस्तंभ का रूप धारण किया। ब्रह्मा जी ऊपर की ओर गए और उन्होंने केतकी फूल से झूठ बुलवाकर कहा कि वे स्तंभ का अंत देख आए हैं।

इस झूठ से शिवजी क्रोधित हो गए और उन्होंने कहा:

“केतकी! तुमने झूठ का साथ दिया है, अतः आज से तुम मेरी पूजा में अयोग्य हो।”
शिवपुराण, रुद्र संहिता, अध्याय 6

निष्कर्ष: केतकी का फूल शिवलिंग पर चढ़ाना शास्त्र विरुद्ध और पाप समान है।

2. तुलसी दल – विष्णुप्रिया, शिवपूजा में वर्जित

तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में पूजनीय है, लेकिन शिव पूजा में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। तुलसी माता भगवान विष्णु की पत्नी हैं और उनकी पूजा में तुलसी का उपयोग सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

शिवपूजा में तुलसी क्यों वर्जित है, इसका उल्लेख पद्मपुराण में मिलता है:

“तुलसी विष्णुप्रियत्वात् शिवपूजायाम् न योज्यते।”
पद्मपुराण, उत्तरखण्ड

(अर्थ: तुलसी चूंकि विष्णु को प्रिय है, अतः वह शिव की पूजा में नहीं चढ़ाई जाती।)

निष्कर्ष: शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते चढ़ाना शास्त्र के अनुसार वर्जित है।

3. लाल फूल – तामसिकता का प्रतीक

लाल रंग के फूल, विशेषतः लाल गुलाब और गेंदा, आमतौर पर देवी शक्ति की पूजा में चढ़ाए जाते हैं। शिवजी का स्वरूप सौम्य, शांत और सात्विक है।

शिवपुराण में कहा गया है कि भगवान शिव तीनों गुणों – सत, रज और तम से परे हैं:

“शिवं शान्तं यज्ञवेद्यं त्रिगुणातीतं एव च।”
शिवपुराण

लाल रंग रजोगुण और तामसिकता का प्रतीक है, जो शिव तत्व के विपरीत है। इसलिए भले ही इन फूलों का निषेध सीधे न हो, लेकिन यह अनुचित और विरोधाभासी माने जाते हैं।

निष्कर्ष: सावन में शिव पूजा करते समय लाल रंग के फूलों से बचना चाहिए।

शिवजी को कौन से फूल और पत्र प्रिय हैं?

  • बेलपत्र (Bilva leaves)
  • धतूरा, आक का फूल
  • नीले या सफेद रंग के फूल (जैसे कनेर, कमल)
  • शमी पत्र
  • बेर (यदि उपलब्ध हों)

सावन मास में शिव पूजा करते समय भक्तों को पूर्ण श्रद्धा के साथ-साथ शास्त्रों का भी ध्यान रखना चाहिए। केतकी, तुलसी और लाल रंग के फूल – इन तीनों का उपयोग शिवलिंग पर वर्जित या अनुचित माना गया है।

सही विधि से की गई पूजा, उचित सामग्री से शिवजी को प्रसन्न करती है और साधक को जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

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By Religion World July 17, 2025 3 min read
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