ओम शांति के आध्यात्मिक उद्घोषों के साथ वैश्विक शिखर सम्मेलन का जोरदार आगाज
- उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने किया विधिवत उद्घाटन
- आध्यात्मिकता द्वारा एकता, शांति और समृद्धि विषय पर मंथन करने के लिए विश्व के 140 देशों से जुटे अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ-विद्वान
- 1 अक्टूबर तक चलेगा पांच दिवसीय सम्मेलन
- केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और ब्रह्माकुमारीज की मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने किया शुभारंभ
27 सितंबर, आबू रोड। ओम शांति के आध्यात्मिक उद्घोषों के साथ राजस्थान के आबू रोड स्थित ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन परिसर में एकता, शांति और समृद्धि थीम पर पांंच दिवसीय वैश्विक शिखर सम्मेलन का शुक्रवार शाम को भव्य आगाज हुआ। स्व परिवर्तन ही विश्व परिवर्तन की कुंजी है और इस दिशा में आध्यात्मिकता सशक्त माध्यम है। सम्मेलन में विश्व के 140 देशों से सात हजार से अधिक विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, विद्वान, राजनीतिक, आध्यात्मिक गुरु और व्यापार जगत की हस्तियों ने शिरकत की है। शनिवार सुबह 10 बजे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन करेंगे।


समारोह के स्वागत सत्र में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि ऐसा कहा गया है कि 84 लाख योनी पार करने के बाद इंसान का जन्म होता है। कितनी मुश्किलों को पार करके लोग यहां तक पहुंचे हैं। ईश्वर ने यदि आपके इस लायक बनाया है तो आपके मन में सभी के प्रति यह समभाव होना चाहिए। कोई भेद नहीं होना चाहिए न समाज के प्रति, न देश के प्रति और न इंसान के प्रति।
संस्थान की मुख्य प्रशासिका और स्वच्छ भारत अभियान की ब्रांड एंबेसेडर 103 वर्षीय दादी जानकी ने सभी अतिथियों का स्वागत करने हुए कहा कि परमात्मा से जुड़कर ही जीवन का उद्धार किया जा सकता है। जिसने भगवान को अपना बना लिया, उसे अपने बारे में सोचने की आवश्यकता नहीं है। फिर उसकी पालना स्वयं भगवान करते हैं। इंसान और परमात्मा के बीच बाप और बच्चे का रिश्ता है। दुनिया के हर इंसान को इस रिश्ते को समझने की जरूरत है। जिसने इस रिश्ते का समझ लिया वही परमात्मा की प्रत्यक्षता कर सकता है। वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना ही दुनिया को प्रेम, शांति और एकता के बंधन बांध सकती है।

कोयम्बटूर से पधारे केजी हॉस्पिटल के चेयरमैन पद्यश्री डॉ. जी. भक्तवत्सलम ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज में 46 हजार बहनें विश्व के 140 देशों में शांति और आध्यात्मिकता का संदेश दे रही हैं। 12 साल पहले राजयोग मेडिटेशन ने मेरा जीवन पूरी तरह से बदल दिया। ये संस्था विश्व में मिसाल कायम कर रही है।

सरकार और समाज को मौन तोडऩा होगा: पद्यश्री सुनीता
हैदराबाद से पधारीं प्रज्वला कंपनी की संस्थापक पद्यश्री सुनीता कृष्णनन ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के प्रति देश में यौन अपराधों में तेजी से हिंसा में इजाफा हुआ है। सरकारें और समाज मौन हैं। बच्चियों पर बंदिश लगाने की बजाय घरों में बेटों को ये समझाने की जरूरत है कि स्त्री भोग की वस्तु नहीं है। छोटी-छोटी बच्चियां घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं, ये मौन तोडऩा होगा। ब्रह्माकुमारीज संस्थान महिलाओं की बड़ी सेना के जरिए लोगों को आत्मिक रूप से सशक्त करने में जुटी हुई है। साथ ही ये संस्था महिला सशक्किरण की मिसाल है। बता दें कि पद्यश्री सुनीता ने महिला सशक्तिकरण में अलख जगाकर सैकड़ों महिलाओं और बच्चियों को वैश्यावृत्ति के दलदल से बाहर निकालकर मिसाल समाज में एक मिसाल कायम की है।
इन्होंने भी रखे अपने विचार…
– यूएसए से पधारीं मेरीलैंड की आध्यात्म प्रमुख म्यर्टल ऐनी ब्रिस्टल ने कहा कि यहां देह अभिमानी की बजाय आत्माभिमानी का भान है यदि उसे अंगीकार किया जाए तो विश्व में एकता, शांति और समृद्धि लाई जा सकती है। पश्चिमी देशों में भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को बड़ी उम्मीद के साथ देखा जा रहा है। ये संस्था इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
– उड़ीसा बालासोर के फकीर मोहन यूनिवर्सिटी की वॉइस चांसलर प्रो. मधुलिता दास ने कहा कि ये संस्था समाज में सकारात्मक विचारों के माध्यम से लोगों को बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा दे रही है।
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