ब्रज चौरासी कोस यात्रा शुरू : भागवताचार्य संजयकृष्ण सलिलजी की सालााना ब्रज सेवा
ब्रज चौरासी कोस की परिकम्मा एक देत ।
लख चौरासी योनि के संकट हरिहर लेत ॥
वृंदावन के प्रसिद्ध भागवताचार्य संजयकृष्ण सलिल जी महाराज ने अपनी सालाना ब्रज चौारासी कोस की यात्रा आरंभ कर दी है। इस साल ये यात्रा 20-27 फरवरी तक आयोजित हो रही है। सालाना होना वाले इस आयोजन में नि:शुल्क ब्रज के चौरासी यात्रा का अवसर मिलता है। इस आयोजन में हर साल हजारों लोग शामिल होते है।

प्रतिवर्ष की भाँति डॉ संजय कृष्ण सलिल जी द्वारा 17 वीं निःशुल्क ब्रज चौरासी कोस यात्रा का शुभारंभ 21 फरवरी से हुआ, जो कि 27 फरवरी को समापन होगी । इसमें महाराज जी के सानिध्य में हज़ारों वैष्णव वाहनों के द्वारा यात्रा का लाभ ले रहे है। इसके साथ ही सभी भक्तों को पूज्य महाराज जी द्वारा रुकने के लिए कमरों एवं तीनों समय के भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी एकदम निःशुल्क करवाई जाती है। यात्रा का शुभारंभ, हज़ारों भक्तों संग धूमधाम से शोभायात्रा कर वृन्दावन नगर भ्रमण करते हुए यमुना जी का पूजन एवं चुनरी मनोरथ से किया गया। उसके पश्चात यात्रा अलग-अलग स्थानों को रवाना हो दर्शन किए गए और शाम को वृन्दावन वापस आ कर रात्रि भोजन, भागवत कथा का श्रवण महाराज जी से सभी भक्तों को होते हैं । यहीं क्रम 7 दिनों तक तक रहता है । अंतिम दिन (रंगभरनी एकादशी) पर सभी भक्तों को साथ लेकर श्री बाँके बिहारी जी से होली खेलने जाते हैं और सभी भक्तों को आशीर्वाद स्मृति चिन्ह देते हैं और विदाई समारोह होता है।

ब्रज चौरासी कोस की यात्रा का महत्व
वराह पुराण कहता है कि पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ हैं और वे सभी चातुर्मास में ब्रजमें आकर निवास करते हैं। यही वजह है कि व्रज यात्रा करने वाले इन दिनों यहाँ खिंचे चले आते हैं। हज़ारों श्रद्धालु ब्रज के वनों में डेरा डाले रहते हैं।
ब्रजभूमि की यह पौराणिक यात्रा हज़ारों साल पुरानी है। चालीस दिन में पूरी होने वाली ब्रज चौरासी कोस यात्रा का उल्लेख वेद-पुराण व श्रुति ग्रंथसंहिता में भी है। कृष्ण की बाल क्रीड़ाओं से ही नहीं, सत युग में भक्त ध्रुव ने भी यही आकर नारदजी से गुरु मन्त्र ले अखंड तपस्या की व ब्रज परिक्रमा की थी।
- त्रेता युग में प्रभु राम के लघु भ्राता शत्रुघ्न ने मधु पुत्र लवणासुर को मार कर ब्रज परिक्रमा की थी। गली बारी स्थित शत्रुघ्न मंदिर यात्रा मार्ग में अति महत्व का माना जाता है।
- द्वापर युग में उद्धव जी ने गोपियों के साथ ब्रज परिक्रमा की।
- कलि युग में जैन और बौद्ध धर्मों के स्तूप बैल्य संघाराम आदि स्थलों के सांख्य इस परियात्रा की पुष्टि करते हैं।
- 14वीं शताब्दी में जैन धर्माचार्य जिन प्रभु शूरी की में ब्रज यात्रा का उल्लेख आता है।
- 15वीं शताब्दी में माध्व सम्प्रदाय के आचार्य मघवेंद्र पुरी महाराज की यात्रा का वर्णन है तो
- 16वीं शताब्दी में महाप्रभु वल्लभाचार्य, गोस्वामी विट्ठलनाथ, चैतन्य मत केसरीचैतन्य महाप्रभु, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, नारायण भट्ट, निम्बार्क संप्रदायके चतुरानागा आदि ने ब्रज यात्रा की थी।
एक बार नन्दबाबा और यशोदा मैया ने सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन-यात्रा पर जाने की इच्छा प्रकट की। तो श्री कृष्ण जी ने उनसे कहा, “मैया, मैं सारे तीर्थों को ब्रज में ही बुला लेता हूँ। तुम ब्रज में ही सभी तीर्थ-स्थलों की दर्शन-यात्रा कर लेना। अतः समस्त तीर्थ ठाकुर जी की आज्ञानुसार ब्रज में निवास करने लगे। ऐसा माना गया है कि ब्रज-धाम की परिक्रमा-यात्रा सर्वप्रथम चतुर्मुख ब्रह्मा जी ने की थी। वत्स हरण के पश्चात् उनके अपराध की शान्ति के लिये स्वयं श्रीकृष्ण ने उन्हें ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा करने का आदेश दिया था। तभी से ब्रज यात्रा का सूत्रपात हुआ। श्री कृष्ण जी के प्रपौत्र श्री वज्रनाभजी द्वारा भी ब्रज यात्रा की गयी थी। कालांतर में परम रसिक संत शिरोमणि श्री स्वामी हरिदासजी, श्री हरिवंश जी, श्रीवल्लभाचार्य जी, श्री हरिराम व्यास जी, श्री चैतन्य महाप्रभु जी आदि अनेक वैष्णव एवं गौड़ीय सम्प्रदाय आचार्यों द्वारा ब्रज यात्रा का सुत्र पात हुआ जिसे आज भी लाखों भक्त प्रतिवर्ष करते हैं। ब्रज चौरासी कोस की यात्रा करने से मनुष्य को चौरासी लाख योनियों से छुटकारा मिल जाता है।
भागवचार्य संजयकृष्ण द्वारा आयोजित ब्रज चौारासी कोस की यात्रा बरसों से हजारों लोगों के लिए मुक्ति और अनुभव का माध्यम बनती रही है। उनकी इस पावन सोच के पीछे कान्हा की नगरी में मौजूद हर विशिष्टता से सबको परिचित कराना भी है। अपनी कथाओं में भगवान कृष्ण के जीवन को कर्म और मर्म से पेश करने वाले सलिलजी ने धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कई सेवा कार्य करने के इच्छुक रहते है।
मान्यता है कि ब्रज की महिमा उसकी रज-रज में है। तभी तो कहा गया है कि…..
मुक्ति कहै गोपाल सौ मेरि मुक्ति बताय।
ब्रज रज उड़ि मस्तक लगै मुक्ति मुक्त हो जाय॥


बरसाना में आज पहुंची ब्रज चौरासी कोस की यात्रा – वर्णन सुनें महाराजजी और भक्तों के मुख से….
साभार – http://www.salilradhe.com/
Editorial Review Note
Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
Leave a Reply