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बृहस्पति का तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश के शुभ-अशुभ परिणाम 

बृहस्पति का तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश के शुभ-अशुभ परिणाम 

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बृहस्पति का तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश के शुभ-अशुभ परिणाम 

बृहस्पति का तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश के शुभ-अशुभ परिणाम 

भारतीय वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति अथवा गुरु ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। नवग्रहों मे बृहस्पति शुभ ग्रह माने जाते हैं तथा इन्हें देवताओ का गुरु माना जाता है जिस कारण हमारी धरती पर यह आशीर्वाद, उन्नति, महानता तथा ज्ञान का प्रतीक माने जाते हैं। गुरु ग्रह का गोचर जातक को सफलता, भाग्य की उन्नति, धन की प्राप्ति तथा सांसारिक सुख प्रदान करता है इसके उचित रूप से शुभ परिणाम पाने के लिए जातक को बहुत ज्यादा मेहनत के साथ साथ दूसरों को सम्मान देते हुये लक्ष्य निर्धारित करके ईश्वर पर आस्था रखनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जब भी बृहस्पति किसी की कुंडली में शुभ अवस्था में होता है तो ऐसा जातक धार्मिक व आध्यात्मिक जगत से जुड़ा हुआ होता है इस गुरु ग्रह की पांचवीं,सातवी तथा नवी दृष्टि जिस भाव पर भी पड़ती है उस भाव से संबंधित बहुत ही अच्छे फल जातक को मिलते हैं, यह बृहस्पति जब चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11 भाव में होते हैं तो यह बड़े शुभ माने जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र में गुरु ग्रह को धर्म, ज्ञान और सुख-समृद्धि का कारक ग्रह माना गया है। 

गुरु गोचर वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि गुरु जीवन में उन्नति का कारक होता है और वैदिक ज्योतिष में गुरु को अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। बृहस्पति को देव गुरु कहा जाता है और यह ज्ञान, कर्म, धन, पुत्र और विवाह का कारक होता है। बृहस्पति के प्रभाव से जातक का मन धर्म एवं आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगता है। इसके अलावा जातक को करियर में उन्नति, स्वास्थ्य लाभ, मजबूत आर्थिक स्थिति, विवाह एवं संतानोत्पत्ति जैसे शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि कुंडली में बृहस्पति बलवान है तो अन्य ग्रहों की स्थिति ठीक नहीं होने पर भी कोई कष्ट या हानि नहीं होती है। बृहस्पति के बलवान होने पर उक्त जातक का परिवार, समाज और हर क्षेत्र में प्रभाव रहेगा।तशास्त्री के अनुसार ज्योतिष मे साम: यह हैं कि जिन राशियों को बृहस्पति अथवा गुरु दें।

11 अक्टूबर 2018 रात्रि 8:29 पर बृहस्पति अथवा गुरु तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। जहां से यह अतिचारी अवस्था में 30 मार्च, 2019 यानि शनिवार को रात 3.11 को धनु राशि मे प्रवेश करेंगे, 10 अप्रैल 2019 से वक्री होकर 22 अप्रैल 2019 को वापस वृश्चिक राशि मे लौटेंगे जहां से 11 अगस्त 2019 को मार्गी होकर 5 नवंबर 2019 को वृश्चिक राशि छोड़कर धनु राशि मे प्रवेश करेंगे।

पिछले 1 वर्ष से गुरु शुक्र की तुला राशि में रहे तथा उन्होंने शुक्र के क्षेत्र खासतौर फिल्म इंडस्ट्री को बहुत से नुकसान प्रदान किए इस तुला राशि से अब यह गुरु मंगल की जुनूनी, मेहनती व रहस्यमय राशि वृश्चिक में प्रवेश कर रहे हैं, जहां यह 5 नवंबर 2019 तक रहेंगे।

गुरु ग्रह का स्वभाव ज्ञानी महात्मा के समान होता है इनका मंगल की वृश्चिक राशि में प्रवेश गुप्तता लिए हुये होगा क्यूंकि गुरु जहां बहुमुखी तथा विस्तार करना पसंद करते हैं, वहीं वृश्चिक राशि गुप्त रहने वाली तथा अपने में मग्न रहना पसंद करती है। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल स्थिर स्वभाव, अग्नि तत्व तथा जलीय राशि का है वृश्चिक राशि काल पुरुष की अष्टम भाव में आने के कारण नकारात्मक प्रभाव की मानी जाती है यहां पर यह गुरु विशाखा, अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्र से गुजरेंगे क्योंकि वृश्चिक राशि गुरु की मित्र राशि है, तो यहाँ यह कालपुरुष के अष्टम भाव का प्रभाव भी देंगे, जिससे कोई संक्रामक रोग जो कि जल से संबंधित हो सकता हैं धरती पर फैल सकता है 1981 से 1982 के बीच जब गुरु वृश्चिक राशि से गुजरा थे तो पूरी दुनिया में एड्स नामक बीमारी फैली थी। 

जब गुरु इस वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे तब वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल अपनी ऊंच राशि मकर में केतु के साथ होगा। इस दौरान गुरु 10 अप्रैल 2019 से 11 अगस्त 2019 के बीच वक्री अवस्था में होंगे जिसके प्रभाव से प्राकृतिक आपदाएं तथा आतंकवाद का प्रभाव बढ़ेगा | गुरु 17 नवंबर 2018 से 11 दिसंबर 2018 के बीच अस्त अवस्था में रहेंगे,27 नवंबर 2018 को इनकी सूर्य से समान अंशों में युति बनेगी जिसके धरती पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलेंगे।

  • यह गुरु स्वतंत्र भारत के कुंडली के सप्तम भाव से व चन्द्र कुंडली से पंचम भाव से गुजरेंगे तथा काल पुरुष के अष्टम भाव से गुजरेंगे जिस कारण भारत मे आध्यात्मिक वृद्धि तथा धार्मिक स्थानों का दोबारा से बनाया जाना जैसे परिणाम प्राप्त होंगे।
  • पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार भारत की कुंडली के तीसरे भाव पर दृष्टि होने के कारण पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध बनाने में मदद करेंगे,संचार तथा शोध से संबंधित कई कार्यो में योजनाएं बनवाएंगे,लग्न पर दृस्टी होने से राज्य पक्ष को लाभ,विदेशो से मान सम्मान,अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा आदि बढ़ाएँगे तथा एकादश भाव मे दृष्टि होने से सरकार के राजकीय कोष मे वृद्धि,व्यापार और अर्थव्यवस्था में सुधार करेंगे।

अपने इस गोचर मे यह गुरु वृश्चिक राशि के विशाखा,अनुराधा व ज्येष्ठा नक्षत्र से गुजरेंगे जब यह विशेष रूप से अनुराधा नक्षत्र मे प्रवेश करेंगे तब टैक्स चोरी करने वालों को दंड देने हेतु सरकारी योजनाएं सिरे चढ़ेंगी तथा फौज को मजबूती मिलेगी परंतु प्राकृतिक घटनाओं जैसे बाढ़ और भूकंप से देश को नुकसान भी होगा।

देवगुरु वृहस्पति के इस राशि परिवर्तन से मुख्य रूप से देखे तो भारत मे निम्न प्रभाव देखने को मिलेंगे…

👉🏻देश में 2019 मे “एनडीए” की सरकार ही आएगी क्यूंकि सप्तम भाव से गुरु का गोचर होगां जो विरोधियो को हानी देगा जिस कारण महागठबंधन नहीं बन पाएगा।

👉🏻भारत खेलों मे बड़ा नाम करेगा विशेषकर क्रिकेट का विश्वकप भारत इस वर्ष जीत सकता हैं।

👉🏻कई प्रसिद्द व्यक्तियों विशेषकर स्त्रियों का विवाह इस वर्ष होगा, जिसके बाद वह अपने अपने क्षेत्र से विदा ले लेंगी।

👉🏻विपक्ष के कुछ बड़े नेता या तो अपना पद छोड़ देंगे या मृत्यु को प्राप्त होंगे |

  • ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री

RW

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By Religion World October 1, 2018 5 min read
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