बिहार, 19 नवम्बर; बिहार के वैशाली जिले से तीसरी बार विश्वशांति के लिए विश्व के 12 देशों के बौद्ध भिक्षुओं ने रविवार से रैलिक स्तूप परिसर में तीन दिवसीय बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथ “त्रिपिटक का पाठ’ प्रारंभ किया। सोमवार को वट थाई बौद्ध टेंपल से विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक पाठ परिषद द्वारा पाठ शृंखला के तत्वावधान में वैशाली के अभिषेक पुष्करणी के तट पर अवस्थित रैलिक स्तूपा परिसर में वट थाई मंदिर के प्रधान भंते डॉ. पी सी चन्दाश्री के सानिध्य में “विनय त्रिपिटक’ का पाठ भी किया गया। यहीं से भगवान बुद्ध का अस्थि कलश प्राप्त हुआ था।
विगत 20 दिनों से देश के विभिन्न बौद्ध स्थल पर त्रिपिटक पाठ के बाद अंतिम पाठ दिसंबर माह में बोध गया में आयोजित होगा। अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक पाठ परिषद के वंगमू दीक्षे (अमेरिका) ने बताया कि वैशाली में भगवान बुद्ध की “अस्थि कलश” की स्थापना के बाद बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु (धर्मावलंबी) का आगमन प्रारम्भ हो जाएगा। पर्यटन स्थल के रूप में वैशाली का विकास होगा। यह भगवान बुद्ध की कर्म भूमि है। यह भूमि बौद्ध धर्म के लिए पवित्र तीर्थ स्थल है। विगत 3 वर्षों से रैलिक स्तूप परिसर में अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक पाठ विश्व में शांति, अमन और खुशहाली के लिए आयोजित होता है। इसी शृंखला में यहां पर रविवार से मंगलवार तक आयोजन किया गया है। जिसमें 12 देश के 250 से अधिक बौद्ध भिक्षु व भिक्षुणी भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर बर्मा बौद्ध टेंपल के प्रधान सूर्या भंते, कम्बोडिया बौद्ध टेंपल के मोरम थावी के अलावा स्थानीय विधायक राजकिशोर सिंह, संगीति बौद्ध, डॉ. रामनरेश राय आदि ने भाग लिया।
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