बदलाव के लिये स्वयं सेवा : कैरिटस इंडिया की पहल

- बदलाव के लिये स्वयं सेवा कांफ्रेंस का औचित्य ’स्वयं सेवा के अभिनव तरीकों को सीखना
- सामरिक सोच, विभिन्न हितधारकों के साथ संबंध एवं भागीदारी,
- स्वयं सेवाओं की पहल को बढ़ावा देना, नेटवर्क तैयार करना आदि पर विचार विमर्श
- बदलाव के लिये स्वयं सेवा’ आल इंडिया कांफ्रेंस में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने किया सहभाग
- भारत और विदेश से 200 से अधिक विशिष्ट प्रतिनिधियों ने की शिरकत
कार्यक्रम केे उद्घाटन इतालवी आर्चबिशप और वेटिकन राजनयिक, गिआमबाटिस्टा डायक्वात्रो, अपोस्टोलिक ननस्यो एपोस्टोलिक न्यूजिशिचर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज सह-संस्थापक, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस, जेकब मर बारानास, बिशप गुड़गांव, श्री टोनी कैसलमैन, कैथोलिक राहत सेवा, प्रतिनिधि दक्षिण एशिया, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, फ्रेडरिक डिसूजा, कार्यकारी निदेशक, कैरिटस इंडिया, फादर पाली, सह-कार्यकारी निदेशक कैरिटस इंडिया एवं विश्व के अनेक देशों से पधारे गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

जीवा के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा ’सेवा के लिये बड़ी-बड़ी डिग्रीयाँ या उच्च शिक्षा की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसके लिये तो कोमल हृदय और शुद्ध चरित्र ही बहुत है; मानव सेवा ही माधव सेवा है। उन्होने कहा कि मनुष्य को सेवा करना सीखना है तो वक्षों से, नदियों से, बादलों से और सूर्य से सीखना चाहिये जो बिना किसी स्वार्थ के देते और सिर्फ देते ही रहते है परन्तु अब वापस करने का समय आ गया है; प्रकृति की सेवा का समय आ गया है। उन्होने सभी का ध्यान बढ़ते प्रदूषण की ओर आकर्षित करते हुये कहा कि पहले बच्चों के गर्मी और सर्दी के अवकाश होते थे अब प्रदूषण अवकाश भी होने लगा है। सांस लेने के लिये स्वच्छ हवा नहीं है लोग घरों में कैद होेने को मजबुर है अब तो जागने का समय है नहीं तो ’अर्थ (पृथ्वी) का अनर्थ’ होते देर नहीं लगेगी।’

जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा, ’सेवा कोई क्षेत्र नहीं है बल्कि वह एक भावनात्मक एहसास है जो दूसरों के कष्टों को कम कर उनकी झोली में खुशियों की दस्तक देता हैं।’ इस कांफ्रेंस में विश्वविख्यात वक्ताओं ने सहभाग किया जिसमें विशेष रूप से आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती, गिआमबाटिस्टा डायक्वात्रो, बिशप जेबक मर बारानासा, डाॅ टोनी कैसलमैन, दक्षिण एशिया प्रतिनिधि, कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज, सुश्री किरण सोनी गुप्ता, एएस और एफए, युवा और खेल मंत्रालय, श्री निगेल वालेस, स्वामी शांतात्मानन्द, सचिव रामकृष्ण मिशन दिल्ली, डाॅ मोहम्मद सलीम, महासचिव, जमात-ए-इस्लामी हिन्द, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती, अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव, जीवा, के नागभूषण, बौद्ध, सुश्री त्रिना चक्रवर्ती, फादर जेगथ गैसपर, रिजीन चेन्नई, सुश्री अंजा निकोलय, कैरिटस आस्ट्रिया, संदीप तलवार, अक्षय पेट्रा फाउंडेशन, श्री मेथ्यू चेरियन, डाॅ रोहित शिपस्टोन, श्री संदीप चचड़ा, सुश्री मेघा पाटकर, सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता एवं श्री रमेश सी, एकता परिषद आदि विशेष वक्ता थे।
सह-कार्यकारी निदेशक, फादर पाली ने सभी गणमान्य अतिथियांे का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि ’भारतीय समृद्ध परम्परा का मंत्र है ’सर्वे भवन्तु सुखिनः’ अर्थात सभी प्राणी, हर स्थान पर खुश और स्वतंत्र रहे। उन्होने बताया कि प्रभु यीशु मसीह के प्रेम आदेश से प्रेरित होकर कैरिटस इंडिया की स्थापना 1962 में की गयी थी तब से यह गैर-सरकारी संगठन सभी के कल्याण के लिये प्रयासरत है।’ स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने इस कांफें्रस के माध्यम से ’पीपल एंड प्लेनेट’ अर्थात लोगो और ग्रह की सेवा के लिये स्वयं सेवकों का आहृवान किया। उन्होने पृथ्वी, पानी, पर्यावरण, प्रकृति, पौधे और पहाड़ों की सुरक्षा के लिये सभी देशवासियों का आहृवान किया और मिलकर सेवा करने का संदेश दिया।
स्वामी जी ने जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया तथा कैरिटस इंडिया की टीम को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया साथ ही इस उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिये कैरिटस के कार्यकारी निदेशक फे्रडरिक डिसूजा एवं उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। कैरिटस इंडिया द्वारा उन स्वयं सेवकों को सम्मानित किया गया जो भारत के विभिन्न प्रांताें में रहकर मानवता की सेवा के लिये समर्पित है। इस अवसर पर गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन से सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी उपस्थित थी।
Editorial Review Note
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