अमृतसर, 13 अगस्त; संगरूर के मस्तूआणा में हूबहू सचखंड श्री हरमंदिर साहिब की तरह बनाए जा रहे गुरुद्वारे के विरुद्ध सिखों का एक शिष्टमंडल श्री अकाल तख्त पहुंचा।
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के निजी सचिव जसपाल सिंह को एक मांग पत्र सौंपते हुए जत्थे की अगुवाई कर रहे जत्थेदार पुरषोत्तम सिंह ने मांग की कि सचखंड की नकल के बनाए जा रहे इस गुरुद्वारा साहिब के डिजाइन में तबदीली की जाए। इस गुरुद्वारा के ट्रस्ट के अध्यक्ष सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा को श्री अकाल तख्त पर तलब किया जाए।
जत्थेदार पुरषोत्तम सिंह ने कहा कि इस गुरुद्वारा साहिब का प्रबंध एसजीपीसी को सौंपे जाने के लिए उन्होंने ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मांग की है। गुरुद्वारा साहिब के प्रबंध को लेकर सिख गुरुद्वारा आयोग में चले मुकद्दमे में ढींढसा हार गए हैं। इसके बावजूद ढींढसा इस गुरुद्वारा साहिब की 400 एकड़ भूमि के साथ कई शिक्षण संस्थानों पर कब्जा किए हुए हैं। ढींढसा को श्री अकाल तख्त साहिब में तलब कर उनसे गुरुद्वारा साहिब की सारी जायदाद लेकर एसजीपीसी के हवाले की जाए। 2019 में एसजीपीसी के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान भी पुरषोत्तम सिंह ने अपने साथियों के साथ तेजा सिंह समुंद्री हाल के बाहर इस गुरुद्वारे के विरुद्ध प्रदर्शन किया था।
जत्थेदार पुरषोत्तम सिंह 2009 में श्री अकाल तख्त के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के समक्ष पेश होकर कहा था कि मस्तूआणा में श्री हरमंदिर साहिब की नकल के एक गुरुद्वारे का निर्माण किया जा रहा है।
जत्थेदार ने एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह संमुद्री हाल में आयोजित पांच सिंह की बैठक में उक्त गुरुद्वारे का संचालन करने वाली कमेटी को आदेश दिए थे कि गुरुद्वारे के सरोवर को पूर दिया जाए। गुरुद्वारा साहिब की तरफ जाने वाले रास्ते के पुल को गिरा दिया जाए।
भवन के आसपास बरामदा तोड़ा जाए और भवन के ऊपर जितने भी छोटे-छोटे गुंबद बने हैं, उन्हें गिरा कर एक गुंबद स्थापित किया जाए। पांच सिंह की बैठक में एसजीपीसी को उक्त आदेश दिए गए थे। 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी एसजीपीसी पांच सिंह साहिबान के इस फैसले को लागू नहीं कर सकी है।
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