चर्च ऑफ़ होली स्कल्पचर में है ईसा मसीह का मकबरा

इजरायल के यरुशलम में ‘चर्च ऑफ द हॉली स्पल्चर’ स्थित है। कहा जाता है कि इसी चर्च में वो चट्टान है, जिस पर 33वीं ईसवीं में ईसा मसीह को दफनाने के लिए रखा गया था। चट्टान के ऊपर संगरमर का ढांचा है, जिसे पिछले वर्ष शोधकर्ताओं ने हटाया है। चट्टान हटाते समय शोधकर्ताओं के साथ कई ईसाई धर्मगुरु और श्रद्धालु भी मौजूद थे।
देखिए वो पत्थर, जिस पर यीशू मसीह को लिटाया गया था…
ईशनिंदा का दोषी पाते हुए ईसा मसीह को सुनाई गई थी मौत की सजा
मान्यताओं के अनुसार, यहूदियों के उच्च धर्माध्यक्ष और प्रचीन इजरायल की सुप्रीम काउंसिल ने ईशनिंदा का दोषी पाते हुए ईसा मसीह को मौत की सजा सुनाई गई थी। तब इजरायल के येरुशलम (अब इजरायल की राजधानी) में जिस जगह पर चर्च ऑफ होली स्कल्पचर बना है, वहीं उन्हें सूली पर चढ़ाया गया (क्रूसीफिकेशन) था, और बाद में वहीं दफना दिया गया। उन्हें पहली सदी में ही सूली पर चढ़ाया गया था। इस जगह की पहचान चौथी सदी में ही हो गई थी। ये चर्च ईसाई समुदाय के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और दुनियाभर से लोग यहां पहुंचते हैं। इसे गोलगोथा और द प्लेस ऑफ स्कल के नाम से भी जाना जाता है।

टूम्ब पर ईसा मसीह की कब्र और उनके पुनर्जीवित होने की जगह की मान्यता
इसकी पहचान एक ऐसे जगह के तौर पर की गई, जहां शहर की दीवार के बाहर एक वीरान पत्थर की खदान है। ईसा मसीह के सूली पर चढ़ाए जाने के करीब 10 साल बाद इस जगह को तीसरी दीवार बनाकर घेर दिया गया। हालांकि, ईसाई समुदाय मौजूदा वक्त में गार्डन टूम्ब पर ईसा मसीह की कब्र और उनके पुनर्जीवित होने की जगह मानता है। इस जगह की खोज 1867 में हुई, जिसके बाद 1894 से गार्डन टॉम्ब और इसके आस-पास के बगीचों का ईसाइयों के धार्मिक स्थल के तौर पर रख-रखाव किया जा रहा है।

क्या है क्रूसीफिकेशन का इतिहास
क्रूसीफिकेशन यानी सूली पर चढ़ाने का इतिहास ईसा मसीह के जन्म से पहले का माना जाता है। ब्रिटानिका रिपोर्ट के मुताबिक, सूली पर चढ़ाए जाने के पहला ऐतिहासिक रिकॉर्ड करीब 519 ईसा पूर्व का है, जब बेबीलोन में पर्सिया के राजा डरिअस प्रथम ने अपने 3000 राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को सूली पर चढ़वा दिया था।
येरुशलम से तीन प्रमुख धर्मों को मानने वालों की भावनाएं जुड़ीं
महज 0.35 स्क्वेयर मील में दीवार से घिरा येरुशलम का पुराना शहर कई धार्मिक स्थलों और मॉन्युमेंट्स का गढ़ है। यह यहूदियों, मुस्लिमों और ईसाइयों का पवित्र शहर है। यहां ईसाइयों की संख्या कुल आबादी की दो फीसदी है, यानी करीब 14,000 ईसाई हैं। जीसस को सूली पर चढ़ाने और पुनर्जन्म की जगहें इनके पवित्र धार्मिक स्थल हैं। दुनियाभर से ईसाई यहां पहुंचते हैं।
यरुशलम में यहूदियों की संख्या आबादी का 62 फीसदी है। यह प्राचीन इजरायली किंगडम की राजधानी है और यहां यहूदियों के कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं।
यहां मुस्लिमों की संख्या आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा है। मक्का और मदीना के बाद यह मुस्लिमों की सबसे पवित्र जगह है।

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