कथा के माध्यम से प्रकृति सेवा, प्रसाद-उपहार के रूप में पौधे देकर संभालने का संकल्प
जयपुर, धर्म जगत में कथा का अपना महत्व है और इसे सुनने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। व्यास पीठ से कही गई बात को लोग गांठ बनाकर उसे व्यवहार में उतारने की कोशिश करते हैं। ऐेसे में धर्मगुरुओं की जरूरत और उनके संदेशों से समाज में परिवर्तन को सहज ही समझा जा सकता है। जयपुर में चल रही देवी वैभवीश्री जी की कथा ने एक नया उदाहरण पेश किया है। उनकी कथा में कथा श्रोताओं को प्रसाद-उपहार के रूप में पौधे देकर संभालने का संकल्प दिया गया।



देवी वैभवीश्री की कथाओं में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ये खुशी के पल ऱहे, जब उन्हें एक जिम्मेदारी मिली। एक पौधे के देखरेख की जिम्मेदारी पाकर वो खुश हुए।


देवी वैभवीश्री ने कथा के दौरान कहा कि, प्रकृति भगवान का अभिव्यक्त स्वरूप है, प्रकृति के प्रति प्रेम याने भगवान के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति है। आध्यात्मपीठ से सामाजिक कार्य के प्रति जागरूकता ईश्वरीय सेवा है। देवी जी ने कई वर्षों से प्रकृति की सेवा का प्रण लिया हुआ है और वे समय-समय पर पौधारोपण से ये सेवा करती रहती हैं।

जैसे प्रकृति सेवा से हमें प्रकृति का आशीर्वाद मिलता है वैसे ही कथा के श्रवण से जीवन में संस्कार की प्राप्ति होती है। कथा में ऐसे प्रयासों से समाज को एक सकारात्मक संदेश जाता है।
Editorial Review Note
Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.