RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

धनतेरस से दीवाली तक: खुशियों और समृद्धि का पर्व 

धनतेरस से दीवाली तक: खुशियों और समृद्धि का पर्व 

धनतेरस से दीवाली तक: खुशियों और समृद्धि का पर्व 
Visual Archive

धनतेरस से दीवाली तक: खुशियों और समृद्धि का पर्व 

धनतेरस से दीवाली तक: खुशियों और समृद्धि का पर्व 

भारत त्योहारों की भूमि है, और उन सभी में दीवाली सबसे चमकदार और हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला पर्व है। यह त्योहार न केवल रोशनी का प्रतीक है, बल्कि सकारात्मकता, समृद्धि और शुभ शुरुआत का भी संदेश देता है। इस वर्ष दीवाली पर्व 19 से 21 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा, जिसमें हर दिन का अपना विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

धनतेरस

दीवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, जो आयुर्वेद के देवता और स्वास्थ्य के रक्षक माने जाते हैं। इसलिए, इस दिन धन्वंतरि पूजा, माँ लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना की जाती है।
मान्यता है कि धनतेरस के दिन बर्तन, सोना, चाँदी या कोई मूल्यवान वस्तु खरीदने से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है और समृद्धि बनी रहती है। लोग इस दिन अपने घरों को दीपों और रंगोली से सजाते हैं तथा नए व्यापार की शुरुआत भी शुभ मानी जाती है।

नरक चतुर्दशी और यम दीपदान

धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
इस दिन सुबह स्नान करके तिल के तेल का दीप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। लोग यमराज के नाम का दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाते हैं, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है।
शाम को लोग घर में दीप जलाते हैं और छोटे बच्चों के साथ फुलझड़ियाँ जलाकर उत्सव का आनंद लेते हैं।

21 अक्टूबर 2025

तीसरा दिन यानी 21 अक्टूबर को मुख्य दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और उसी घर में प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, श्रद्धा और दीपों का प्रकाश होता है।
लोग अपने घरों को दीपों, झालरों और रंगोली से सजाते हैं। पूजा के समय लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को पूर्व दिशा की ओर रखकर विधिवत पूजन किया जाता है।
दीवाली की रात को हर व्यक्ति अपने जीवन में प्रकाश, समृद्धि और शुभता का स्वागत करता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जैसे अंधकार पर प्रकाश की जीत होती है, वैसे ही हमें जीवन में सदैव अच्छाई का मार्ग अपनाना चाहिए।

धनतेरस से लेकर दीपावली तक के ये तीन दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि परिवार, मित्रता और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी देते हैं। यह पर्व हर घर में खुशियाँ लाता है, रिश्तों में मिठास घोलता है और हमें याद दिलाता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि प्रेम और एकता में बसती है।

आप सभी को दीवाली 2025 की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आपका जीवन दीपों की तरह उज्ज्वल और मंगलमय हो।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World October 18, 2025 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

क्या सत्य धर्म है या धर्म सिर्फ रूप और रिवाज़ ?

क्या सत्य धर्म है या धर्म सिर्फ रूप और रिवाज़ ? धर्म मानव जीवन का एक अत्यंत गहरा पक्ष है, जो जन्म से मृत्यु तक हमारी सोच, व्यवहार…

Read now
Christianity

दीपावली, हनुक्का और क्रिसमस — क्या सबका संदेश एक ही है?

दीपावली, हनुक्का और क्रिसमस — क्या सबका संदेश एक ही है? मानव सभ्यता के इतिहास में “प्रकाश” हमेशा से ज्ञान, सत्य और ईश्वर का प्रतीक रहा है। अंधकार…

Read now
Hinduism

क्या दीपावली पर उल्लू या चूहा शुभ माना जाता है?

क्या दीपावली पर उल्लू या चूहा शुभ माना जाता है? दीपावली, भारत का प्रमुख और अत्यंत शुभ त्योहार, घर में लक्ष्मी-गणेश की स्थापना और पूजन के लिए प्रसिद्ध…

Read now