RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

धूमावती जयंती: जानिए माता धूमावती की पूजन विधि और मन्त्र का जाप

धूमावती जयंती: जानिए माता धूमावती की पूजन विधि और मन्त्र का जाप

धूमावती जयंती: जानिए माता धूमावती की पूजन विधि और मन्त्र का जाप
Visual Archive

धूमावती जयंती: जानिए माता धूमावती की पूजन विधि और मन्त्र का जाप

भगवान शिव द्वारा प्रकट की गई दस महाविद्याओं में सातवें स्थान पर पुरुषशून्या विधवा आदि नामों से जानी जाने वाली माँ धूमावती का नाम आता है.



इनका प्राकट्य ज्येष्ठ शुक्लपक्ष अष्टमी को हुआ. विधवा, भिक्षाटन, दरिद्रता, भूकंप, सूखा, बाढ़, प्यास रुदन, वैधव्य, पुत्रसंताप, कलह इनकी साक्षात प्रतिमाएं हैं.

डरावनी शक्ल, रुक्षता, अपंग शरीर जिनके दंड का फल है इन सब की मूल प्रकृति में पराम्बा धूमावती ही हैं. इनका निवास ज्येष्ठा ‘नक्षत्र’ है.

इसीलिए इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक जीवन पर्यन्त स्वास्थ्य अथवा किसी न किसी प्रकार के संघर्षों से लड़ता रहता है. इन्हें ही अलक्ष्मी नाम से भी जाना जाता है.

यह भी पढ़ें-गायत्री जयंती 2020: ऐसे हुआ था मां गायत्री का अवतरण, जानें जन्म कथा

धूमावती माता की कथा

हिन्दू पौराणिक कथाओं में से एक के अनुसार भगवान शिव जी की पत्नी पार्वती ने उनसे भूख लगने पर कुछ खाने की मांग की. जिसके बाद शिव जी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वो कुछ खाने का प्रबंध करते है, लेकिन जब शिव कुछ देर तक भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाते है, तब पार्वती ने भूख से बेचैन होकर शिव को ही निगल लिया. इसके बाद भगवान शिव के गले में विष होने की वजह से पार्वती जी के शरीर से धुवाँ निकलने लगा. जहर के प्रभाव से वह भयंकर दिखने लगी उसके बाद शिव ने उनसे कहा की तुम्हारे इस रूप को धूमावती के नाम से जाना जायेगा, और भगवान शिव के अभिशाप की वजह से उन्हें एक विधवा के रूप में पूजा जाता है. क्योकि उन्होंने अपने पति शिव को ही निगल लिया था. इस रूप में वह बहुत क्रूर दिखती है जो कि एक हाथ में तलवार धारण किये हुए रहती है.

धूमावती माता की पूजा विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर के पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करके जल, पुष्प, सिन्दूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप तथा नैवैद्य आदि से मां का पूजन करें.
इस दिन मां धूमावती की कथा कहने और सुनने से काफी फायदा मिलता है.
मां धूमावती की कृपा से इंसान के सभी पापों का नाश होता है.



धूमावती माता का मंत्र 

ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्..
धूं धूं धूमावती ठ: ठ:.
मां धूमावती का तांत्रोक्त मंत्र
धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे.
सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:..

[video_ads]

You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta May 30, 2020 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

ज्येष्ठ अमावस्या 2020: जानिए ज्येष्ठ अमावस्या का मुहूर्त और पूजा विधि

धार्मिक शास्त्रों में अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व माना गया है। 22 मई को ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पड़ रही है। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत…

Read now
Hinduism

महात्मा ज्योतिबा फूले जयंती: ऐसा महात्मा जिसने महिलाओं के लिए खोला था पहला स्कूल

महात्मा ज्योतिबा फुले 19वी सदी के महान समाज सुधारक, विचारक, दार्शनिक और लेखक थे। उन्होंने भारतीय समाज में फैली अनेक कुरीतियों को दूर कर हिंदू समाज में समरसता…

Read now
Hinduism

मां धूमावती जयंती : कथा, महत्त्व और पूजा विधि  

मां धूमावती जयंती : कथा, महत्त्व और पूजा विधि मां धूमावती जयंती के विशेष अवसर पर दस महाविद्या का पूजन किया जाता है. धूमावती जयंती समारोह में धूमावती…

Read now