मिस्र के पिरामिडों का निर्माण काल प्राचीन वास्तुशास्त्र का बेजोड़ और आश्चर्यजनक नमूना है । इसलिए इन्हें दुनियां के सात आश्चर्यों में से एक माना जाता है।
अपने भीमकाय आकार, अनूठी संरचना तथा पिरामिडों के अंदर की विलक्षण जादुई रोग निवारण शक्ति विज्ञान को भी आश्चर्य में डाल देती है । इन पिरामिडों के अंदर जो ऊर्जा तरंगे प्रवाहित होती हैं, उनसे स्नायु विकार और मानसिक रोगियों का क्षण भर में इलाज हो जाता है । पिरामिड पॉवर के अस्तित्व को पाश्च्यात विद्वान अकाट्य रूप से मानते हैं।
पिरामिड के बारे में किवदंतियां
कहते हैं की इस पिरामिड के अंदर रखा हुआ पानी पिने से पेट की बीमारियां गायब हो जाती हैं। गले की टॉन्सिल, शरीर के घाव, खरोच और गठिया जैसे रोग से ग्रस्त रोगियों ने भी पिरामिड के अंदर घुसकर अपने रोगों से मुक्ति पाई है । इन पिरामिडों की देखादेखी मिस्र के आसपास के शहरों में पिरामिड आकार की अनेक बस्तियां दिखाई देती हैं । मिस्र में ही नहीं बल्कि अमेरिका, फ़्रांस, यूगोस्लाविया आदि देशों में लोगों ने अपने घर की छतों में लकड़ी या पीवीसी, प्लास्टिक से पिरामिड आकार के परकोटे बना लिए हैं । वे ऐसा मानते हैं कि मानसिक तनाव को दूर करने के लिए इन पिरामिडों के अंदर बैठने से या कुछ देर सो जाने से शरीर एकदम स्वस्थ्य हो जाता है। मिस्र के आसपास की बस्तियों में पिरामिड आकार की टोपियां भी खूब बिकती हैं । वहां के तांत्रिकों के मतानुसार अनेक गुप्त रोग इन टोपियों के पहनने से ठीक हो जातें हैं । ईसा से हजारों वर्ष पूर्व इन पिरामिडों के निर्माण में जहाँ सैकड़ों वर्ष लग जाने की किवदंती आती है, वहीँ यह भी कहा जाता है कि स्थापत्य कला का यह बेजोड़ नमूना दुनियां में कहीं भी उपलब्ध नहीं है ।
पिरामिड के आकार में क्या ख़ास है

पिरामिडों की कुल ऊंचाई से एक तिहाई ऊंचाई पर रखा हुआ शव न तो सड़ता है और न गलता है, वह ‘ ममी ‘ कहलाता है । यह सब उस नुकीले आकार के अद्भुत पिरामिड की ऊर्जा का ही चमत्कार होगा जो कि आज भी जड़ और चेतन पदार्थों पर असर दिखाता है । यह जानना जरुरी है कि इस पिरामिड की आकृति में ऐसी कौन सी खास बात है जो अपने अंदर समाहित जिव-जंतु या मनुष्य आदि को रोग मुक्त कर देती है । यूरोप और अन्य देशों में जहाँ गर्मी अत्यधिक होती है, वहां पिरामिड आकार के कोल्ड स्टोरेज बनाये जाते हैं । यहाँ तक कहते हैं नकली पिरामिड भी कुछ असली पिरामिड जैसा जादुई प्रभाव दिखाता है । इनके अंदर रखी हुई खाने–पिने की वस्तुएं दो–दो महीने तक तरोतजा रहती हैं जलहीन हो जाने के वावजूद वे सड़ती–गलती नहीं हैं। इन चमत्कारों को देखते हुए वैज्ञानिकों का मानना है कि पिरामिडों की पर्वताकार आकृति ही ऐसी है कि आकाश की संतुलित ऊर्जा ( हवा,पानी और प्रकाश ) उसकी चोटी पर एकत्रित होती हैं वहां से पिरामिड के धरातल की तरफ समतल दीवारों से एक साथ धरती तक आती है । स्वच्छ जलवायु को निचे प्रेषित कर के एक–सी आकार की बनी ढलवां दीवारों से दूषित ऊर्जा बाहर निकल जाती है ।
त्रिकोण और खटकोण से आवृत मध्य बिंदु तक जो वातावरण केंद्रित होता है, उसमे अनेक प्रकार की ऊर्जा तरंगों का समावेश होता है, जो जड़ और चेतन पदार्थ की विकृतियों को हटा देता है । यह कुछ उसी सिद्धांत पर आधारित है, जैसे घर में चूल्हे के ऊपर बनी धुएं वाली चिमनी बहुत छोटे छेद से चारो तरफ फैले चूल्हे की प्रदूषित ऊर्जा को बाहर फेंक देता है तथा कमरे का वातावरण आग जलने के बावजूद प्रदूषणमुक्त हो जाता है ।
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मिस्र के पिरामिडों के आश्चर्यजनक स्थापत्य और वास्तु कौशल को देखकर आधुनिक इंजीनियरों ने यह अनुमान लगाया कि मिश्र के पिरामिडों के जैसे पिरामिड दोबारा नहीं बनाये जा सकते हैं जबकि आज के समय में शक्तिशाली क्रेन, बुलडोजर, भारवाहक मशीनों के होते हुए 15-20 टन के शिलाखण्डों (चट्टान) को इतनी कुशलता से ऊपर तक ले जाना और जोड़ना संभव नहीं है। आश्चर्य यह है कि पत्थरों को परस्पर इस प्रकार से जोड़ा गया है कि इनके जोड़ों का कहीं भी पता नहीं चलता ।
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