गुजरात के तारंगा हिल्स में खोदाई के दौरान मिला बौद्ध स्तूप
गुजरात, 22 जून; गुजरात के अलावली रेंज के तारंगा हिल में बौद्ध धर्म का केंद्र होने के महत्वपूर्वण सबूत मिले हैं। देव नी मोरी साइट में तीसरी ईसवीं शताब्दी के भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष युक्त एक स्तूप और एक कास्केट मिला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की यहां लगातार खोदाई जारी है।
विभाग के अधिकारी इस नई खोज से काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि खोदाई में जो स्तूप मिला है वह क्षत्रपा अवधि (1 से 4 शताब्दी) के बीच के हैं। यह अनुमान वहां मिले मिट्टी के बर्तनों और दूसरी कलाकृतियों को देखकर लगाया गया है।
पुरातत्व विभाग के अधीक्षक डॉ. अभिजीत आंबेडकर ने बताया कि तारंगा हिल के ढगोलिया शिखर पर एक चक्की दिखाई देने की सूचना मिली थी। यह ढांचे की चोटी थी जो वहां नजर आ रही थी। इसके बाद फैसला लिया गया कि उस जगह पर खोदाई का जाएगी।

खोदाई की गई तो यह स्तूप निकलकर आया। अधिकारियों ने बताया कि ढांचे का व्यास आठ मीटर का है। यह पत्थर तोड़कर बनाया गया है। इन पत्थरों को पत्थरों से जलाकर तराशा गया है और उससे ढांचा तैयार किया गया है। ढांचे में बनाया गया रैंप भी पत्थरों के टुकड़े से ही बना है।
नॉर्थ गुजरात में हुई खोदाई के बाद पता चला है कि यह इलाका बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थान हुआ करता था। एएसआई ने कुछ दिनों पहले यहां 50 मीटर लंबा ढांचा खोदाई में निकाला था। वह ढांचा 5वीं ईसवीं शताब्दी का था। यह तारंगा हिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह जनपद वाडनगर से 38 किलोमीटर दूर है। इससे पहले वाडनगर में भी एएसआई ने इसी तरह के ढांचे वाले दो सेल्स मिले थे।
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