एक्सक्लूसिव : “अमरनाथ की आस्था, आंकड़ों की ज़ुबानी”

नई दिल्ली, 26 जुलाई; आस्था का स्थान केवल भगवान और भक्त के बीच की कड़ी भर ही नहीं होता, वो समाज को जोड़ने वाली एक शक्ति की तरह काम करती है। किसी मेले या मंदिर में किसी खास समय लोगों का जुटना समाज के सरोकार और सहभागिता के नियम को कायम रखता है। हिंदू धर्म के कई धर्मस्थान बहुत की मेहनत करके नापे जाते हैें। ये ऊंची पहाड़ियों से लेकर संकरे रास्तों से हमें परमसत्ता का अहसास देने वाले दैवीय आस्था के केन्द्र हैं। भगवान शिव से जुड़ा अमरनाथ धाम भी एक ऐसी ही जगह है, जहां साल के कुछ महीने प्रकृति भगवान शिव का रूप ले लेती है। आइए पहले आपको कश्मीर की ऊंची वादियों में बसे अमरनाथ गुफा के बारे में कुछ रोचक बातें बतातें है।
- अमरनाथ गुफा को ढूंढने वाला एक मुसलमान व्यक्ति था। इस शख्स का नाम बूता मलिक था।
- ये गुफा शिव और पावर्ती के संवाद के लिए जानी जाती है, और एक कबूतर के जोड़े को इस संवाद का साक्षी माना जाता है।
- अमरनाथ की गुफा लगभग 160 फुट लम्बी, 100 फुट चौड़ी और काफी ऊंची है।
- अमरनाथ में शिवलिंग पक्के बर्फ की बनती है और गुफा के बाहर मीलों तक हर जगह कच्ची बर्फ ही बर्फ फैली है।
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कहते हैं कि जब भक्त भगवान से मिलने की ठान ले तो स्वयं ईश्वर भी भक्त को खुद से मिलने के लिए नहीं रोक सकता. कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल रहा है बाबा बर्फानी के दर्शन के दौरान इस साल। हाल ही में हुए आतंकी हमले और खराब मौसम के बावजूद अमरनाथ यात्रियों के हौंसले बुलंद हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस साल बाबा बर्फानी के दर्शनार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है।

पिछले साल का आंकड़ा किया पार
इस बार श्रद्धालुओं ने पिछले साल का आंकड़ा पार कर लिया है. दरअसल, आतंक के साए में शुरू हुई यात्रा के बीच बाबा बर्फानी के दर्शनों करने वाले भक्तों की संख्या 2 लाख 40 हजार हो गई है जबकि यात्री पूर्ण होने तक ये आंकड़ा 3 लाख के पार जा सकता है. इस बार करीब 2 लाख 30 हजार श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था लेकिन यात्रा को अभी 14 दिन बाकी हैं और श्रद्धालुओं का आंकड़ा पिछले साल के आंकड़े को पार कर गया है.
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जम्मू कश्मीर के हालातों का असर अमरनाथ यात्रा पर
पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर में हालत बिगड़ने का सीधा असर श्री अमरनाथ यात्रा पर पड़ा है. सात साल पहले यह यात्रा अपने चरम पर थी और 2011 में 6.35 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र शिवलिंग के दर्शन किए थे लेकिन आज छह साल बाद हम 2011 आंकड़े के पचास प्रतिशत श्रद्धालुओं तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं. इस साल कुल 2.30 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया है और यह 2011 के कुल श्रद्धालुओं का करीब 36 फीसदी बैठता है यानि छह साल में यात्रा एक तिहाई रह गई है.

फॉलोअप
अमरनाथ यात्रा के 31वें दिन 1273 यात्रियों ने हिम शिवलिंग के दर्शन किए हैं. जिससे अब तक बाबा बर्फानी के दर्शन करने वालों की संख्या 2,52,599 से पार हो गई है. अमरनाथ यात्रा अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है और जम्मू में स्थित 2 पंजीकरण केंद्रों में बहुत ही कम यात्री पंजीकरण के लिए आ रहे हैं. यात्रियों का मानना है कि प्रशासन को एक ही स्थान पर पंजीकरण की व्यवस्था करनी चाहिए थी, जबकि रेलवे स्टेशन जम्मू में वैष्णवी धाम व सरस्वती धाम में पंजीकरण प्रक्रिया अब भी जारी है.
2002 में मात्र 1.10 लाख तीर्थयात्री थे
पिछले साल भी यह आंकड़ा 2.20 लाख श्रद्धालुओं का था यानि 2011 की यात्रा से भी एक तिहाई से भी कम श्रद्धालुओं ने यात्रा की. ऐसा नहीं है कि इससे पहले इतनी कम संख्या में श्रद्धालु पवित्र गुफा में गए हों 2002 में महज 1.10 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन किए थे लेकिन 2004 के बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था. 2004 में 3.82 लाख श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन करने गए थे. 2004 से 2015 तक एक बार ही ऐसा मौका आया जब यात्रा तीन लाख से कम थी 2007 में 2.96 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन किए थे.

इस साल दर्शनार्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है और देखने वाली बात यह है कि अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष दुर्घटनाएं और आतंकी हमलों ने भी ताना बाना बुना लेकिन बाबा बर्फानी के निडर भक्त बम भोले के नारे लगाते आगे बढ़ते जा रहे हैं और यह भी संभव है कि अगले वर्ष तक आंकड़ा इस साल से भी ऊपर पहुंच जाए.
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