RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

जानिये कहां विदेशी महिलाएं कर रही पिंडदान

जानिये कहां विदेशी महिलाएं कर रही पिंडदान

जानिये कहां विदेशी महिलाएं कर रही पिंडदान
Visual Archive

जानिये कहां विदेशी महिलाएं कर रही पिंडदान

जानिये कहां विदेशी महिलाएं कर रही पिंडदान

गया, 9 सितम्बर; गया में विदेशी श्रद्धालुओं का एक ग्रुप अपने पितरों की मुक्ति की कामना को लेकर तर्पण व पिंडदान के कार्यों में जुटा था. इन सभी विदेशी श्रद्धालुओं को गया पाल पंडा पुरुषोत्तम लाल कटरियार गोपाल लाल कटरियार सहित अन्य के नेतृत्व में लोक नाथ गौड़ दास ने पिंडदान के कर्मकांडों को पूरा कराया.

अमेरिका, रूस, जर्मनी और स्पेन के 20 पर्यटकों ने पिंडदान व तर्पण किया. यहां आकर मिली शांति मोक्ष स्थली गया में पितरों की मुक्ति के महापर्व पितृपक्ष मेला के दौरान शुक्रवार को देवघाट का नजारा कुछ बदला-बदला सा दिखा.

यह भी पढ़ें-श्राद्ध में किन पशु पक्षियों को कराया जाता है भोजन

हर किसी की निगाहें बस एक ही ओर टिकी थीं. जर्मनी की इवगेनिया ने कहा कि इंडिया धर्म और आध्यात्म की धरती है. गया आकर मुझे आंतरिक शांति की अनुभूति हो रही है. मैं यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आई हूं.

गया में पिंडदान से मिलता है मोक्ष
मान्यता है कि जो लोग अपना शरीर छोड़ जाते हैं वे किसी भी लोक में या किसी भी रूप में हों, श्राद्ध पखवाड़े में पृथ्वी पर विष्णुपद क्षेत्र में आते हैं और श्राद्ध व तर्पण से तृप्त होते हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का एक सहज और सरल मार्ग है. यूं तो देश के कई स्थानों में पिंडदान किया जाता है परंतु फल्गु नदी के तट पर बसे गया में पिंडदान का बहुत महत्व है. कहा जाता है कि भगवान राम और देवी सीता ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए गया में ही पिंडदान किया था.

यह भी पढ़ें-महिलाएं भी कर सकती हैं पितृ तर्पण


श्राद्ध की मूल कल्पना वैदिक दर्शन के कर्मवाद और पुनर्जन्मवाद पर आधारित है. कहा गया है कि आत्मा अमर है जिसका नाश नहीं होता. श्राद्ध का अर्थ अपने देवताओं पितरों और वंश के प्रति श्रद्धा प्रकट करना होता है. गया को विष्णु का नगर माना गया है. यह मोक्ष की भूमि कहलाती है. विष्णु पुराण और वायु पुराण में भी इसकी चर्चा की गई है. विष्णु पुराण के मुताबिक गया में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है और वे स्वर्ग में वास करते हैं. माना जाता है कि स्वयं विष्णु यहां पितृ देवता के रूप में मौजूद हैं इसलिए इसे ‘पितृ तीर्थ’ भी कहा जाता है.

 

 

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta September 9, 2017 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

हिंदू धर्म के सभी 18 पुराण : विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ

पुराण शब्द का अर्थ है प्राचीन कथा। पुराण विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता कि बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव…

Read now
Hinduism

विश्व पर्यावरण दिवस: लॉकडाउन में इस ख़ास थीम के साथ मनाया जाएगा पर्यावरण दिवस

पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 5 जून को अलग-अलग थीम पर विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस साल इस दिन की…

Read now
Hinduism

कोरोना से आर्थिक नुकसान से परेशान जर्मनी के मंत्री ने की आत्महत्या

फ्रैंकफर्ट, 30 मार्च;  कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान की भरपाई को लेकर ”बेहद चिंतित” जर्मनी के हेसे राज्य के वित्त मंत्री थॉमस शाएफर ने…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *