भगवान गणेश के बारे में कहा जाता है कि वो सभी विघ्नों और बाधाओं को समाप्त करके व्यक्ति में समृद्धि का संचार करते हैं। आप भारत के अधिकाश घरों में भगवान गणेश के अलग अलग रूपों को वास करते हुए देखेंगे, साथ ही आपको ये भी मिलेगा कि महत्त्वपूर्ण अवसरों पर हमेशा ही भगवान गणेश को प्राथमिकता दी जाती है।
गणेश मंदिर सीरीज के प्रथम भाग में दक्षिण भारत के तीन गणेश मंदिर मधुर महागणपति मंदिर , शरावू महागणपति मंदिर और अनेगुड्डे विनायक मंदिर की जानकारी देंगे ।
मधुर महागणपति मंदिर,कासरगोड
गणेशजी के प्राचीन मंदिरों में से एक मधुर महागणपति मंदिर केरल में मधुरवाहिनी नदी के तट पर स्थित है। इसका इतिहास 10वीं शताब्दी का माना जाता है। प्रारंभ में यहां शिवजी का ही मंदिर था, लेकिन बाद में ये गणेशजी का मुख्य मंदिर बन गया। इस संबंध में क्षेत्र में कई मान्यताएं प्रचलित हैं।
क्षेत्र में प्रचलित मान्यता के अनुसार प्रारंभ में यहां सिर्फ शिवजी का ही मंदिर था। उस समय यहां पंडित के साथ उसका पुत्र भी रहता था। पंडित के छोटे बच्चे ने एक दिन मंदिर की दीवार पर गणेशजी की आकृति बना दी। बाद में ये चित्र धीरे-धीरे अपना आकार बढ़ाने लगा और ये आकृति बड़ी और मोटी होती गई। दीवार पर चमत्कारी रूप से उभरी इस प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे। बाद में यहां गणेशजी की पूजा मुख्य रूप से होने लगी। मंदिर के पास ही मधुरवाहिनी नदी है। इस नदी के नाम पर ही मधुर महागणपति के नाम से मंदिर प्रसिद्ध हुआ है।
ये मंदिर केरल के कासरगोड शहर से करीब 7 किमी दूर स्थित है। यहां मोगराल नदी यानी मधुवाहिनी नदी बहती है। मंदिर में एक तालाब है। यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार तालाब का पानी औषधीय गुणों से भरपूर है। मुदप्पा सेवा यहां मनाया जाने वाला एक विशेष त्यौहार है, जिसमें भगवान गणपति की प्रतिमा को मीठे चावल और घी के मिश्रण से ढंक दिया जाता है, जिसे मुदप्पम कहते हैं।
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शरावू महागणपति मंदिर, मैंगलोर
मैंगलोर शहर के बीचों बीच स्थित शरावू महागणपति मंदिर अपने आप में बेमिसाल है। कहा जाता है कि इस मंदिर में हर रोज़ हज़ारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। आपको बता दें कि ये मंदिर एक 800 साल पुरानी संरचना है और यहाँ आपको भगवान गणेश के अलावा श्री श्रबेश्वर और नाग ब्रह्मा की मूर्तियों के दर्शन होंगे।
शारवू नाम ‘शर’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है तीर। मंदिर प्रांगण साफ सुथरा और भक्रतों का शांत वातारण प्रदान करता है। माना जाता है कि भगवान गणेश अपने भक्तों को उनकी परेशानियों और दुखों से दूर करते हैं। किसी भी उद्यम को शुरू करने से पहले श्उरी गणेश से प्रार्थना की जाती है ।
मंदिर में विशेष रूप से संक्रांति, गणेश चतुर्थी और दशहरा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दिनों में भीड़ होती है। मंदिर में आरती और वहां रखी पालकी लगभग हर श्रद्धालु खींचते हैं। ये अनुष्ठान पारंपरिक वाद्य संगीत के साथ-साथ मंत्रोच्चार के साथ होते हैं।
अनेगुड्डे विनायक मंदिर, उडुपी
यह मंदिर कर्नाटक के उडुपी जिले के कुम्भाशी गांव में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर में अगस्त्य ऋषि यहां यज्ञ करने के लिए आए थे। लेकिन उनके यज्ञ में विंघ्न डालने के लिए दैत्य कुंभासुर वहां आ गया। अगस्त्य ऋषि की रक्षा करने के लिए भगवान गणेश ने भीम को दिव्य अस्त्र देकर भेजा, फलस्वरूप वो दानव बलशाली भीम के हाथों मारा गया। यहां के भगवान सिद्धी विनायक के नाम से जाना जाता है। इस गांव का नाम भी इस राक्षक के नाम पर ही आधारित है।
भगवान गणेश को समर्पित, तुलूनाडू के सप्तक्षेत्रों में से एक और मुक्ति स्थल के नाम से भी जाना जाने वाली इस जगह पर, लोगों की मान्यता के अनुसार, मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। इसका नाम दो शब्दों अने, जिसका मतलब हाथी है और गुड्डी, जिसका अर्थ है पहाड़ियाँ, से मिलकर बनता है। भगवान गणेश की मूर्ति, जिसके चार हाथ हैं, मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मौजूद है। दो हाथ ‘वरद हस्त ‘ (आशीर्वाद देने के लिये) का प्रतीक जबकि अन्य दो पैर की ओर इशारा करते हुये मुक्ति दर्शाते हैं। गणेश चतुर्थी और संकठा चतुर्थी जैसे त्यौहार इस मंदिर में आयोजित किये जाते हैँ और तीर्थयात्री तुलाभ्रम को भी अनुष्ठान के हिस्सा के रूप में करते हैं।
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