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गणेश विसर्जन पर पर्यावरण का सृजन

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गणेश विसर्जन पर पर्यावरण का सृजन

गणेश विसर्जन पर पर्यावरण का सृजन

  • विसर्जन हो पर नये सृजन के साथ आओं करे इस परम्परा की शुरूआत
  • श्री गणेश विसर्जन के साथ करे पर्यावरण का सृजन
  • पर्व मनाये पर्यावरण के साथ हो इसका श्री गणेश-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 23 सितम्बर। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा से परमार्थ गुरूकुल वीरपुर के छोटे-छोटे ऋषिकुमारों ने मिट्टी के श्री गणेश भगवान बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। 

श्री गणेश का विसर्जन जल में नहीं किया गया बल्कि मिट्टी से बनाये श्री गणेश जी को गमले में रखकर उसमें रूद्राक्ष के दिव्य पौधे का रोपण किया गया। इस प्रकार गणेश विसर्जन के साथ पर्यावरण के सृजन की नवोदित शुरूआत की गयी।

परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने स्वतः ही खेतों की मिट्टी से श्री गणेश भगवान की मूर्ति बनायी थी आज धूमधाम के साथ श्री गणेश विसर्जन के साथ रूद्राक्ष के पौधे के सृजन की परम्परा का शुभारम्भ किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’भारत जैसे आध्यात्मिक राष्ट्र में अनेक तीज-त्योहार, उत्सव, पर्व एवं कर्मकाण्ड मनाये जाते है। इन्ही कार्यक्रमों के अन्तर्गत श्री गणेश उत्सव एवं श्री दुर्गा उत्सव मनाये जाते है तथा करोड़ों की संख्या में मूर्तियों का विसर्जन जलस्रोतों में किया जाता है। अक्सर मूर्तियों का निर्माण प्लास्टर आॅफ पेरिस, प्लास्टिक, सीमेंट, सिन्थेटिक, विविध रंगों से, थर्मोकोल, क्ले, घास-फूस एवं पुआल से किया जाता है। प्रतिमाओं को आकर्षक बनाने के लिये रंग-बिरंगे आयल पेंट का उपयोग किया जाता है। जब इन मूर्तियों का विसर्जन जल में किया जाता है तो पेंट और अन्य पदार्थो में विलेय घातक रसायन हमारे जल स्रोतो को जहरीला बना देते है जिसका सीधा प्रभाव जलीय वनस्पतियों, एवं जीव-जन्तुओं पर पड़ता है। इसलिये आज इस परम्परा को बदलने का समय आ गया है अब हमें जागरूकता के साथ उत्सव मनाना होगा ताकि हमारा पर्यावरण सुरक्षित रह सके।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी देशवासियों का आह्वान करते हुये कहा कि मिट्टी की मूर्तियों की स्थापना करें जिससे पर्यावरण का संरक्षण होगा। साथ ही मूर्तियों का विसर्जन जल में न करके उसी मिट्टी को गमलों में डालकर उसमें पौधों का रोपण करे इस प्रकार श्री गणेश के विसर्जन से पौधों के सृजन का एक नवोदित संकल्प उभरेगा। हम ऐसे पर्व मनायें जिससे परम्परायें भी बचेगी और पर्यावरण भी बचेगा।’’

जर्मनी से आयी प्रसिद्ध अभिनेत्री एस्टर ने कहा कि परमार्थ निकेतन में होने वाली गंगा आरती तथा पर्यावरण एवं परम्पराओं की रक्षा के लिये मनाये जाने वाले उत्सवों ने मुझे अत्यंत प्रभावित किया। मैंने यहां आकर जाना की जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव किये जा सकते है ताकि हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।

परमार्थ गुरूकुल में स्थापित श्री गणेश जी के विसर्जन द्वारा पौधे का सृजन के अवसर पर जर्मनी से आयी प्रसि़द्ध अभिनेत्री एस्टर, जाॅबस्ट निग, फिल्मकार, जर्मनी, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, रूपा राव, अमेक्टी स्टूडियोज प्राइवेट लिमिटेड, बैंगलोर,फैबियन मोर, कोबाल्ट डाॅक्यूमंट्री बर्लिन, जर्मनी, सुश्री नन्दबाला, परमार्थ गुरूकुल वीरपुर के आचार्य और ऋषिकुमार उपस्थित थे।

RW

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By Religion World September 23, 2018 3 min read
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