गया में हुआ प्रद्युम्न का पिंडदान, ठाकुर परिवार ने नहीं किसी और ने किया पिंडदान
गया, 20 सितम्बर; पितृपक्ष में अपने पूर्वजों और पितरों का पिंडदान और तर्पण करने के लिए लाखों लोग गया पहुंचते हैं. लेकिन, गया में एक ऐसा भी परिवार है, जो पिछले डेढ़ दशक से गरीबों, हादसों के शिकार तथा ऐसे लोगों के लिए पिंडदान करता है, जिन्होंने जीवित रहते समाज को काफी कुछ दिया हो. हाल ही में उसने हत्याकांड के शिकार बालक प्रद्युम्न तथा उड़ी के शहीदों के लिए तर्पण किया.
गया के रहने वाले चंदन कुमार सिंह ने प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के नजदीक देवघाट पर पूरे हिन्दू रीति-रिवाज और धार्मिक परम्पराओं के मुताबिक गुरुग्राम के रायन इंटरनैशनल स्कूल के छात्र प्रद्युमन, पत्रकार गौरी लंकेश और गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से मौत के शिकार हुए बच्चों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया.
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साल 2001 से निभा रहे हैं यह परम्परा
चंदन ने बताया कि उनके पिता सुरेश नारायण ने साल 2001 में गुजरात भूकंप का शिकार हुए लोगों का पिंडदान किया था. उसके बाद से इस परिवार के लिए यह कार्य परंपरा बन गई. मेरे पिता ने लगातार 13 वर्षों तक इस परंपरा का निर्वाह किया और उनके निधन के बाद मैं इस कार्य को निभा रहा हूं.
चंदन का कहना है कि पूरी दुनिया अपनी है. अगर किसी का बेटा या परिजन होकर पिंडदान करने से किसी की आत्मा को शांति मिल जाती है, तो इससे बड़ा कार्य क्या हो सकता है. बकौल चंदन, गया की इस धरती पर कोई भी व्यक्ति तिल, गुड़ और कुश के साथ पिंडदान कर दे तो उसके पूर्वजों को मुक्ति मिल जाती है.
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चंदन कहते हैं कि उनके पिता ने मृत्यु के समय ही कहा था कि वह रहे हैं या न रहें परंतु यह परंपरा चलनी चाहिए. गया के देवघाट पर चंदन ने धार्मिक कर्मकांडों और परम्पराओं के मुताबिक गुरुवार को सामूहिक तर्पण और पिंडदान किया.
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