चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को सिर्फ नवरात्री ही नहीं गुड़ी पड़वा और उगादी जैसे पर्व भी मनाये जाते हैं. इन सभी पर्वों का शास्त्रोक्त महत्व होता है और इनकी कथा किसी देवी-देवता से संबंधित होती है.
इसलिए इन तिथियों पर संबंधित देवताओं की पूजा की जाती है. क्या आप जानते हैं गुड़ी पडवा का भगवान राम से भी सम्बन्ध हैं. कैसे आइये जानते हैं-
क्या है गुड़ी का अर्थ
गुड़ी पड़वा का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों में मान्यता है कि इस दिन जगत पिता ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था।
इस दिन हिंदू कैलेंडर का प्रारंभ हुआ था। इसलिए इस दिन को नवसंवत्सर के रूप में देश में मनाया जाता है। गुड़ी का अर्थ विजय पताका होता है।
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श्रीराम ने किया था बाली का वध
दक्षिण भारत के इलाके में रामायण काल में राजा बाली का शासन था। भगवान राम को लंका पर चढ़ाई और माता सीता की मुक्ति के लिए सेना की जरूरत थी। उस समय सुग्रीव ने श्रीराम की मदद की थी।
उस समय सुग्रीव राजा बाली से परेशान थे और बाली के राज्य की प्रजा भी। उस समय श्रीराम ने बाली का वध कर सुग्रीव और प्रजा दोनों को मुक्ति दिलवाई थी।
मान्यता है कि इसलिए इस दिन को महाराष्ट्र के कुछ प्रांतों के लोग विजय के रूप में मनाते हैं। इसके प्रतीक स्वरूप घर के मुख्य द्वार पर गुड़ी को बांधते हैं।
इसके साथ ही इस दिन गुड़, नमक, नीम के फूल, इमली और कच्चे आम का भी सेवन किया जाता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर अशोक या आम के पत्तों की बंदनवार लगाने की भी परंपरा है।
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